- 1
गणेश्वर
ॐ गणेश्वराय नमः।
Om Ganeshvaraya Namah।
जो सृष्टि के स्वामी हैं
- 2
गणक्रीड
ॐ गणक्रीडाय नमः।
Om Ganakridaya Namah।
जो गणों के साथ क्रीडा करने वाले हैं
- 3
गणनाथ
ॐ गणनाथाय नमः।
Om Gananathaya Namah।
जो गणों के नाथ अथवा स्वामी हैं
- 4
गणाधिप
ॐ गणाधिपाय नमः।
Om Ganadhipaya Namah।
जो आदित्य आदि गणदेवताओं के अधिपति हैं
- 5
एकदंष्ट्र
ॐ एकदंष्ट्राय नमः।
Om Ekadamshtraya Namah।
जो एक दाँत वाले हैं
- 6
वक्रतुण्ड
ॐ वक्रतुण्डाय नमः।
Om Vakratundaya Namah।
जो मुड़ी हुयी सूँड वाले हैं
- 7
गजवक्त्र
ॐ गजवक्त्राय नमः।
Om Gajavaktraya Namah।
जो हाथी के समान मुख वाले हैं
- 8
महोदर
ॐ महोदराय नमः।
Om Mahodaraya Namah।
जो विशाल उदर वाले हैं
- 9
लम्बोदर
ॐ लम्बोदराय नमः।
Om Lambodaraya Namah।
जो लम्बे उदर वाले हैं
- 10
धूम्रवर्ण
ॐ धूम्रवर्णाय नमः।
Om Dhumravarnaya Namah।
जिनकी देह धुएँ के रंग की है
- 11
विकट
ॐ विकटाय नमः।
Om Vikataya Namah।
जो विशाल देह वाले हैं
- 12
विघ्ननाशक
ॐ विघ्ननाशकाय नमः।
Om Vighnanashakaya Namah।
जो विघ्नों का नाश करने वाले हैं
- 13
सुमुख
ॐ सुमुखाय नमः।
Om Sumukhaya Namah।
जो सदैव प्रसन्नचित्त रहने वाले हैं
- 14
दुर्मुख
ॐ दुर्मुखाय नमः।
Om Durmukhaya Namah।
जो चञ्चल मुख वाले हैं
- 15
बुद्ध
ॐ बुद्धाय नमः।
Om Buddhaya Namah।
जो ज्ञानवान एवं चतुर हैं
- 16
विघ्नराज
ॐ विघ्नराजाय नमः।
Om Vighnarajaya Namah।
जो समस्त विघ्नों के स्वामी हैं
- 17
गजानन
ॐ गजाननाय नमः।
Om Gajananaya Namah।
जिनका शीश हाथी का है
- 18
भीम
ॐ भीमाय नमः।
Om Bhimaya Namah।
जो विशाल एवं कठोर हैं
- 19
प्रमोद
ॐ प्रमोदाय नमः।
Om Pramodaya Namah।
जो आनन्ददायक साधन प्रदान करने वाले हैं
- 20
आमोद
ॐ आमोदाय नमः।
Om Amodaya Namah।
जो सदैव उत्साहित रहने वाले हैं
- 21
सुरानन्द
ॐ सुरानन्दाय नमः।
Om Suranandaya Namah।
जो शिवगणों को प्रसन्नता प्रदान करने वाले हैं
- 22
मदोत्कट
ॐ मदोत्कटाय नमः।
Om Madotkataya Namah।
जो निष्कपट एवं मेधावी हैं
- 23
हेरम्ब
ॐ हेरम्बाय नमः।
Om Herambaya Namah।
जो दुर्बलों की रक्षा करने वाले हैं
- 24
शम्बर
ॐ शम्बराय नमः।
Om Shambaraya Namah।
जो जल के रूप में निवास करने वाले हैं
- 25
शम्भु
ॐ शम्भवे नमः।
Om Shambhave Namah।
जो आनन्द प्रदान करने वाले हैं
- 26
लम्बकर्ण
ॐ लम्बकर्णाय नमः।
Om Lambakarnaya Namah।
जो बड़े कानों वाले हैं
- 27
महाबल
ॐ महाबलाय नमः।
Om Mahabalaya Namah।
जो अत्यन्त सुदृढ़ एवं साहसी हैं
- 28
नन्दन
ॐ नन्दनाय नमः।
Om Nandanaya Namah।
जो युवा हैं
- 29
अलम्पट
ॐ अलम्पटाय नमः।
Om Alampataya Namah।
जो सुन्दर वस्त्र धारण करने वाले हैं
- 30
अभीरु
ॐ अभीरवे नमः।
Om Abhirave Namah।
जो निर्भीक हैं
- 31
मेघनाद
ॐ मेघनादाय नमः।
Om Meghanadaya Namah।
जो मेघों के समान गर्जना करने वाले हैं
- 32
गणञ्जय
ॐ गणञ्जयाय नमः।
Om Gananjayaya Namah।
जो दुष्टों पर विजय पाने वाले हैं
- 33
विनायक
ॐ विनायकाय नमः।
Om Vinayakaya Namah।
जो सर्वोच्च एवं सर्वश्रेष्ठ हैं
- 34
विरूपाक्ष
ॐ विरूपाक्षाय नमः।
Om Virupakshaya Namah।
जो सूर्य, चन्द्र तथा अग्नि को नेत्रों के रूप में धारण करने वाले हैं
- 35
धीरशूर
ॐ धीरशूराय नमः।
Om Dhirashuraya Namah।
जो अत्यन्त शूरवीर हैं
- 36
वरप्रद
ॐ वरप्रदाय नमः।
Om Varapradaya Namah।
जो वर प्रदान करने वाले हैं
- 37
महागणपति
ॐ महागणपतये नमः।
Om Mahaganapataye Namah।
जो सर्वशक्तिमान हैं
- 38
बुद्धिप्रिय
ॐ बुद्धिप्रियाय नमः।
Om Buddhipriyaya Namah।
जो ज्ञान के प्रशंसक हैं
- 39
क्षिप्रप्रसादन
ॐ क्षिप्रप्रसादनाय नमः।
Om Kshipraprasadanaya Namah।
जो शीघ्र वर प्रदान करने वाले हैं
- 40
रुद्रप्रिय
ॐ रुद्रप्रियाय नमः।
Om Rudrapriyaya Namah।
जो रुद्र मन्त्र के प्रशंसक हैं
- 41
गणाध्यक्ष
ॐ गणाध्यक्षाय नमः।
Om Ganadhyakshaya Namah।
जो छत्तीस सिद्धान्तों की रक्षा करने वाले हैं
- 42
उमापुत्र
ॐ उमापुत्राय नमः।
Om Umaputraya Namah।
जो देवी उमा के पुत्र हैं
- 43
अघनाशन
ॐ अघनाशनाय नमः।
Om Aghanashanaya Namah।
जो पापों का नाश करने वाले हैं
- 44
कुमारगुरु
ॐ कुमारगुरवे नमः।
Om Kumaragurave Namah।
जो भगवान कार्तिकेय के गुरु हैं
- 45
ईशानपुत्र
ॐ ईशानपुत्राय नमः।
Om Ishanaputraya Namah।
जो भगवान शिव के पुत्र हैं
- 46
मूषकवाहन
ॐ मूषकवाहनाय नमः।
Om Mushakavahanaya Namah।
जो मूषक को अपने वाहन के रूप में रखने वाले हैं
- 47
सिद्धिप्रिय
ॐ सिद्धिप्रियाय नमः।
Om Siddhipriyaya Namah।
जो सिद्धि प्रदान करने वाले हैं
- 48
सिद्धिपति
ॐ सिद्धिपतये नमः।
Om Siddhipataye Namah।
जो समस्त सिद्धियों के स्वामी हैं
- 49
सिद्धि
ॐ सिद्धये नमः।
Om Siddhaye Namah।
जो स्वयं सिद्धि स्वरूप हैं
- 50
सिद्धिविनायक
ॐ सिद्धिविनायकाय नमः।
Om Siddhivinayakaya Namah।
जो सफलता प्रदान करने वाले हैं
- 51
अविघ्न
ॐ अविघ्नाय नमः।
Om Avighnaya Namah।
जो अज्ञान को नष्ट करने वाले हैं
- 52
तुम्बरु
ॐ तुम्बुरवे नमः।
Om Tumburave Namah।
जो तुम्बुरु नामक वाद्ययन्त्र से प्रसन्न होने वाले हैं
- 53
सिंहवाहन
ॐ सिंहवाहनाय नमः।
Om Simhavahanaya Namah।
जो सिंह के वाहन पर आरूढ़ रहने वाले हैं
- 54
मोहिनीप्रिय
ॐ मोहिनीप्रियाय नमः।
Om Mohinipriyaya Namah।
जो मोहिनी के प्रिय हैं
- 55
कटङ्कट
ॐ कटङ्कटाय नमः।
Om Katankataya Namah।
जो अज्ञान का नाश करने वाले हैं
- 56
राजपुत्र
ॐ राजपुत्राय नमः।
Om Rajaputraya Namah।
जो राजा वरेण्य के पुत्र हैं
- 57
शालक
ॐ शालकाय नमः।
Om Shalakaya Namah।
जो शान्त एवं संयमित रहने वाले हैं
- 58
सम्मित
ॐ सम्मिताय नमः।
Om Sammitaya Namah।
जो आकार प्रकार में समान एवं अनुरूप हैं
- 59
अमित
ॐ अमिताय नमः।
Om Amitaya Namah।
जो असीमित हैं
- 60
कूष्माण्डसामसम्भूति
ॐ कूष्माण्डसामसम्भूतये नमः।
Om Kushmandasamasambhutaye Namah।
जो वेदों को अपनी सम्पत्ति मानने वाले हैं
- 61
दुर्जय
ॐ दुर्जयाय नमः।
Om Durjayaya Namah।
जो अपराजेय हैं
- 62
धूर्जय
ॐ धूर्जयाय नमः।
Om Dhurjayaya Namah।
जो दुर्जनों को जीतने वाले हैं
- 63
जय
ॐ जयाय नमः।
Om Jayaya Namah।
जो विजयी हैं
- 64
भूपति
ॐ भूपतये नमः।
Om Bhupataye Namah।
जो देवों के देव हैं
- 65
भुवनपति
ॐ भुवनपतये नमः।
Om Bhuvanapataye Namah।
जो संसार के स्वामी हैं
- 66
भूतानां पति
ॐ भूतानां पतये नमः।
Om Bhutanam Pataye Namah।
जो पञ्च तत्वों के अधिपति हैं
- 67
अव्यय
ॐ अव्ययाय नमः।
Om Avyayaya Namah।
जो अमर हैं
- 68
विश्वकर्ता
ॐ विश्वकर्त्रे नमः।
Om Vishvakartre Namah।
जो सृष्टि के निर्माता हैं
- 69
विश्वमुख
ॐ विश्वमुखाय नमः।
Om Vishvamukhaya Namah।
जो मुख के रूप में सृष्टि धारण किये हुये हैं
- 70
विश्वरूप
ॐ विश्वरूपाय नमः।
Om Vishvarupaya Namah।
जो सम्पूर्ण सृष्टि के रूप में हैं
- 71
निधि
ॐ निधये नमः।
Om Nidhaye Namah।
जो नौ निधियाँ प्रदान करने वाले हैं
- 72
घृणि
ॐ घृणये नमः।
Om Ghrinaye Namah।
जो सूर्य के रूप में प्रतिष्ठित हैं
- 73
कवि
ॐ कवये नमः।
Om Kavaye Namah।
जो कवि हैं
- 74
कवीनामृषभ
ॐ कवीनामृषभाय नमः।
Om Kavinamrishabhaya Namah।
जो कवियों में सर्वश्रेष्ठ कवि हैं
- 75
ब्रह्मण्य
ॐ ब्रह्मण्याय नमः।
Om Brahmanyaya Namah।
जो ब्रह्मा के रक्षक हैं
- 76
ब्रह्मणस्पति
ॐ ब्रह्मणस्पतये नमः।
Om Brahmanaspataye Namah।
जो वाणी के स्वामी हैं
- 77
ज्येष्ठराज
ॐ ज्येष्ठराजाय नमः।
Om Jyeshtharajaya Namah।
जो सामवेद के अनुसार सबसे बड़े हैं
- 78
निधिपति
ॐ निधिपतये नमः।
Om Nidhipataye Namah।
जो निधियों के अभिरक्षक हैं
- 79
निधिप्रियपतिप्रिय
ॐ निधिप्रियपतिप्रियाय नमः।
Om Nidhipriyapatipriyaya Namah।
कुबेर भी जिनकी पूजा करते हैं
- 80
हिरण्मयपुरान्तःस्थ
ॐ हिरण्मयपुरान्तःस्थाय नमः।
Om Hiranmayapurantahsthaya Namah।
जो गहरे विचारों में मग्न रहने वाले हैं
- 81
सूर्यमण्डलमध्यग
ॐ सूर्यमण्डलमध्यगाय नमः।
Om Suryamandalamadhyagaya Namah।
जो सूर्यमण्डल में निवास करने वाले हैं
- 82
कराहतिविध्वस्तसिन्धुसलिल
ॐ कराहतिविध्वस्तसिन्धुसलिलाय नमः।
Om Karahatividhvastasindhusalilaya Namah।
जो अपनी सूँड से समुद्र सूखा देने वाले हैं
- 83
पूषदन्तभित्
ॐ पूषदन्तभिदे नमः।
Om Pushadantabhide Namah।
जो पूषा का दाँत खण्डित करने वाले हैं
- 84
उमाङ्ककेलिकुतुकी
ॐ उमाङ्ककेलिकुतुकिने नमः।
Om Umankakelikutukine Namah।
जो माता उमा की गोद में हर्षित होने वाले हैं
- 85
मुक्तिद
ॐ मुक्तिदाय नमः।
Om Muktidaya Namah।
जो मुक्ति प्रदान करने वाले हैं
- 86
कुलपालन
ॐ कुलपालनाय नमः।
Om Kulapalanaya Namah।
जो कुल का पालन/रक्षा करने वाले हैं
- 87
किरीटी
ॐ किरीटिने नमः।
Om Kiritine Namah।
जो सुन्दर मुकुट धारण करने वाले हैं
- 88
कुण्डली
ॐ कुण्डलिने नमः।
Om Kundaline Namah।
जो कुण्डल धारण करने वाले हैं
- 89
हारी
ॐ हारिणे नमः।
Om Harine Namah।
जो मोतियों का हार धारण किये हुये हैं
- 90
वनमाली
ॐ वनमालिने नमः।
Om Vanamaline Namah।
जो सुन्दर पुष्पों के हार से सुशोभित हैं
- 91
मनोमय
ॐ मनोमयाय नमः।
Om Manomayaya Namah।
जो अपने मन की करने वाले हैं
- 92
वैमुख्यहतदैत्यश्री
ॐ वैमुख्यहतदैत्यश्रिये नमः।
Om Vaimukhyahatadaityashriye Namah।
जो अश्रद्धावान का वैभव हरने वाले हैं
- 93
पादाहतिजितक्षिति
ॐ पादाहतिजितक्षितये नमः।
Om Padahatijitakshitaye Namah।
जो अपने चरणों से पृथ्वी का अहङ्कार नष्ट करने वाले हैं
- 94
सद्योजातस्वर्णमुञ्जमेखली
ॐ सद्योजातस्वर्णमुञ्जमेखलिने नमः।
Om Sadyojatasvarnamunjamekhaline Namah।
जो कमर में कुशा घास की मेखला धारण करने वाले हैं
- 95
दुर्निमित्तहृत्
ॐ दुर्निमित्तहृते नमः।
Om Durnimittahrite Namah।
जो अशुभ शकुनों का नाश करने वाले हैं
- 96
दुःस्वप्नहृत्
ॐ दुःस्वप्नहृते नमः।
Om Duhsvapnahrite Namah।
जो दुःस्वप्न का नाश करने वाले हैं
- 97
प्रसहन
ॐ प्रसहनाय नमः।
Om Prasahanaya Namah।
जो दोषों को सहन करने वाले हैं
- 98
गुणी
ॐ गुणिने नमः।
Om Gunine Namah।
जो समस्त गुणों के स्वामी हैं
- 99
नादप्रतिष्ठित
ॐ नादप्रतिष्ठिताय नमः।
Om Nadapratishthitaya Namah।
जो सङ्गीत में विद्यमान रहने वाले हैं
- 100
सुरूप
ॐ सुरूपाय नमः।
Om Surupaya Namah।
जो सुन्दर रूप वाले हैं
- 101
सर्वनेत्राधिवास
ॐ सर्वनेत्राधिवासाय नमः।
Om Sarvanetradhivasaya Namah।
जो सभी के नेत्रों में विद्यमान रहने वाले हैं
- 102
वीरासनाश्रय
ॐ वीरासनाश्रयाय नमः।
Om Virasanashrayaya Namah।
जो सुदृढ़ता से डटे रहने वाले हैं
- 103
पीताम्बर
ॐ पीताम्बराय नमः।
Om Pitambaraya Namah।
जो पीत वस्त्र धारण करने वाले हैं
- 104
खण्डरद
ॐ खण्डरदाय नमः।
Om Khandaradaya Namah।
जिनका एक दाँत खण्डित है
- 105
खण्डेन्दुकृतशेखर
ॐ खण्डेन्दुकृतशेखराय नमः।
Om Khandendukritashekharaya Namah।
जिनके घुँघराले बालों में अर्धचन्द्र सुशोभित है
- 106
चित्राङ्कश्यामदशन
ॐ चित्राङ्कश्यामदशनाय नमः।
Om Chitrankashyamadashanaya Namah।
जो विचित्र रंग-बिरंगे दाँत वाले हैं
- 107
भालचन्द्र
ॐ भालचन्द्राय नमः।
Om Bhalachandraya Namah।
जिनके मस्तक पर चन्द्रमा सुशोभित है
- 108
चतुर्भुज
ॐ चतुर्भुजाय नमः।
Om Chaturbhujaya Namah।
जो चार भुजाधारी हैं
- 109
योगाधिप
ॐ योगाधिपाय नमः।
Om Yogadhipaya Namah।
जो योग के अधिष्ठाता हैं
- 110
तारकस्थ
ॐ तारकस्थाय नमः।
Om Tarakasthaya Namah।
जो तारकमन्त्र में निवास करने वाले हैं
- 111
पुरुष
ॐ पुरुषाय नमः।
Om Purushaya Namah।
जो पुरुष हैं
- 112
गजकर्णक
ॐ गजकर्णकाय नमः।
Om Gajakarnakaya Namah।
जो हाथी के कान वाले हैं
- 113
गणाधिराज
ॐ गणाधिराजाय नमः।
Om Ganadhirajaya Namah।
जो गणों के राजा हैं
- 114
विजयस्थिर
ॐ विजयस्थिराय नमः।
Om Vijayasthiraya Namah।
जो सदैव विजय हेतु आतुर हैं
- 115
गजपतिर्ध्वजी
ॐ गजपतिर्ध्वजिने नमः।
Om Gajapatirdhvajine Namah।
जो हाथी के प्रतीक वाला ध्वज लिये हुए हैं
- 116
देवदेव
ॐ देवदेवाय नमः।
Om Devadevaya Namah।
जो देवताओं के भी देवता हैं
- 117
स्मरप्राणदीपक
ॐ स्मरप्राणदीपकाय नमः।
Om Smarapranadipakaya Namah।
जो मन्मथ को पुनर्जीवित करने वाले हैं
- 118
वायुकीलक
ॐ वायुकीलकाय नमः।
Om Vayukilakaya Namah।
जो जीवन शक्ति के रक्षक हैं
- 119
विपश्चिद्वरद
ॐ विपश्चिद्वरदाय नमः।
Om Vipashchidvaradaya Namah।
जो राजा विपश्चित् को वरदान देने वाले हैं
- 120
नादोन्नादभिन्नबलाहक
ॐ नादोन्नादभिन्नबलाहकाय नमः।
Om Nadonnadabhinnabalahakaya Namah।
जो सूँड से मेघों की दिशा बदल देने वाले हैं
- 121
वराहरदन
ॐ वराहरदनाय नमः।
Om Varaharadanaya Namah।
जो वाराह के दाँत से अधिक सुन्दर दाँत वाले हैं
- 122
मृत्युञ्जय
ॐ मृत्युञ्जयाय नमः।
Om Mrityunjayaya Namah।
जो मृत्यु पर विजय पाने वाले हैं
- 123
व्याघ्राजिनाम्बर
ॐ व्याघ्राजिनाम्बराय नमः।
Om Vyaghrajinambaraya Namah।
जो बाघम्बर धारण करने वाले हैं
- 124
इच्छाशक्तिधर
ॐ इच्छाशक्तिधराय नमः।
Om Ichchhashaktidharaya Namah।
जो आत्म नियन्त्रण में रहने वाले हैं
- 125
देवत्राता
ॐ देवत्रात्रे नमः।
Om Devatratre Namah।
जो देवों की रक्षा करने वाले हैं
- 126
दैत्यविमर्दन
ॐ दैत्यविमर्दनाय नमः।
Om Daityavimardanaya Namah।
जो दैत्यों का संहार करने वाले हैं
- 127
शम्भुवक्त्रोद्भव
ॐ शम्भुवक्त्रोद्भवाय नमः।
Om Shambhuvaktrodbhavaya Namah।
जो शिव के मुख से व्यक्त होने वाले हैं
- 128
शम्भुकोपहा
ॐ शम्भुकोपघ्ने नमः।
Om Shambhukopaghne Namah।
जो शिव जी का क्रोध शान्त करने वाले हैं
- 129
शम्भुहास्यभू
ॐ शम्भुहास्यभुवे नमः।
Om Shambhuhasyabhuve Namah।
जो शिव जी की महिमा का गुणगान करने वाले हैं
- 130
शम्भुतेजस्
ॐ शम्भुतेजसे नमः।
Om Shambhutejase Namah।
जो शिव के समान तेज वाले हैं
- 131
शिवाशोकहारी
ॐ शिवाशोकहारिणे नमः।
Om Shivashokaharine Namah।
जो माता पार्वती (शिवा) के शोक को हरने वाले हैं
- 132
गौरीसुखावह
ॐ गौरीसुखावहाय नमः।
Om Gaurisukhavahaya Namah।
जो माता गौरी को प्रसन्न रखने वाले हैं
- 133
उमाङ्गमलज
ॐ उमाङ्गमलजाय नमः।
Om Umangamalajaya Namah।
जो देवी उमा की गोद में खेलने वाले हैं
- 134
गौरीतेजोभू
ॐ गौरीतेजोभुवे नमः।
Om Gauritejobhuve Namah।
जो माता पार्वती के तेज से उत्पन्न हैं
- 135
स्वर्धुनीभव
ॐ स्वर्धुनीभवाय नमः।
Om Svardhunibhavaya Namah।
जो गङ्गा के उद्भव का कारण हैं
- 136
यज्ञकाय
ॐ यज्ञकायाय नमः।
Om Yajnakayaya Namah।
जो स्वयं यज्ञ स्वरूप हैं
- 137
महानाद
ॐ महानादाय नमः।
Om Mahanadaya Namah।
जो अत्यन्त तेज ध्वनि उत्पन्न करने वाले हैं
- 138
गिरिवर्ष्मा
ॐ गिरिवर्ष्मणे नमः।
Om Girivarshmane Namah।
जो पर्वतों के समान देह वाले हैं
- 139
शुभानन
ॐ शुभाननाय नमः।
Om Shubhananaya Namah।
जो मंगलमयी मुखाकृति वाले हैं
- 140
सर्वात्मा
ॐ सर्वात्मने नमः।
Om Sarvatmane Namah।
जो समस्त सृष्टि में विद्यमान रहने वाले हैं
- 141
सर्वदेवात्मा
ॐ सर्वदेवात्मने नमः।
Om Sarvadevatmane Namah।
जो समस्त देवों में उपस्थित रहने वाले हैं
- 142
ब्रह्ममूर्धा
ॐ ब्रह्ममूर्ध्ने नमः।
Om Brahmamurdhne Namah।
जो ब्रह्मा के मुख वाले हैं
- 143
ककुप्श्रुति
ॐ ककुप्श्रुतये नमः।
Om Kakupshrutaye Namah।
जो दिशाओं को कान के रूप में धारण करने वाले हैं
- 144
ब्रह्माण्डकुम्भ
ॐ ब्रह्माण्डकुम्भाय नमः।
Om Brahmandakumbhaya Namah।
जो सृष्टि को अपने मस्तिष्क के भाग में रखने वाले हैं
- 145
चिद्व्योमभाल
ॐ चिद्व्योमभालाय नमः।
Om Chidvyomabhalaya Namah।
जो अन्तरिक्ष के समान मस्तक वाले हैं
- 146
सत्यशिरोरुह
ॐ सत्यशिरोरुहाय नमः।
Om Satyashiroruhaya Namah।
जो सत्य को केश के रूप में धारण करने वाले हैं
- 147
जगज्जन्मलयोन्मेषनिमेष
ॐ जगज्जन्मलयोन्मेषनिमेषाय नमः।
Om Jagajjanmalayonmeshanimeshaya Namah।
जो क्षणभर में सृष्टि का सृजन एवं संहार करने वाले हैं
- 148
अग्न्यर्कसोमदृक्
ॐ अग्न्यर्कसोमदृशे नमः।
Om Agnyarkasomadrishe Namah।
जो सूर्य, चन्द्र एवं अग्नि को नेत्रों के रूप में धारण करने वाले हैं
- 149
गिरीन्द्रैकरद
ॐ गिरीन्द्रैकरदाय नमः।
Om Girindraikaradaya Namah।
जो मेरु पर्वत को अपने दाँत के रूप में धारण किये हुये हैं
- 150
धर्माधर्मोष्ठ
ॐ धर्माधर्मोष्ठाय नमः।
Om Dharmadharmoshthaya Namah।
धर्म और अधर्म जिनके दोनों ओष्ठ हैं
- 151
सामबृंहित
ॐ सामबृंहिताय नमः।
Om Samabrimhitaya Namah।
सामवेद जिनकी वाणी है
- 152
ग्रहर्क्षदशन
ॐ ग्रहर्क्षदशनाय नमः।
Om Graharkshadashanaya Namah।
जो सूर्य आदि ग्रहों को अपने दाँतों के रूप में धारण करने वाले हैं
- 153
वाणीजिह्व
ॐ वाणीजिह्वाय नमः।
Om Vanijihvaya Namah।
जो वाणी को जिह्वा के रूप में धारण करने वाले हैं
- 154
वासवनासिक
ॐ वासवनासिकाय नमः।
Om Vasavanasikaya Namah।
जो इन्द्र को नासिका के रूप में धारण करने वाले हैं
- 155
कुलाचलांस
ॐ कुलाचलांसाय नमः।
Om Kulachalamsaya Namah।
कुल पर्वत जिनके कन्धो के रूप में स्थित हैं
- 156
सोमार्कघण्ट
ॐ सोमार्कघण्टाय नमः।
Om Somarkaghantaya Namah।
जो चन्द्र रूपी गर्दन वाले हैं
- 157
रुद्रशिरोधर
ॐ रुद्रशिरोधराय नमः।
Om Rudrashirodharaya Namah।
जो सिर पर रुद्र को धारण किये हुये हैं
- 158
नदीनदभुज
ॐ नदीनदभुजाय नमः।
Om Nadinadabhujaya Namah।
गङ्गा आदि नदियाँ और शोणभद्र आदि नद जिनकी भुजायें हैं
- 159
सर्पाङ्गुलीक
ॐ सर्पाङ्गुलीकाय नमः।
Om Sarpangulikaya Namah।
शेष आदि नाग जिनकी अँगुलियों में हैं
- 160
तारकानख
ॐ तारकानखाय नमः।
Om Tarakanakhaya Namah।
जो ध्रुव आदि तारों को नख के रूप में धारण करने वाले हैं
- 161
भ्रूमध्यसंस्थितकर
ॐ भ्रूमध्यसंस्थितकराय नमः।
Om Bhrumadhyasamsthitakaraya Namah।
जो भौंहों के मध्यभाग में स्थित शुण्डदण्ड वाले हैं
- 162
ब्रह्मविद्यामदोत्कट
ॐ ब्रह्मविद्यामदोत्कटाय नमः।
Om Brahmavidyamadotkataya Namah।
जो प्रचुर बुद्धि वाले हैं
- 163
व्योमनाभ
ॐ व्योमनाभये नमः।
Om Vyomanabhaye Namah।
जो आकाश रूपी नाभि वाले हैं
- 164
श्रीहृदय
ॐ श्रीहृदयाय नमः।
Om Shrihridayaya Namah।
जिनका हृदय ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद में संलग्न है
- 165
मेरुपृष्ठ
ॐ मेरुपृष्ठाय नमः।
Om Meruprishthaya Namah।
जो सुमेरु पर्वत रूपी पृष्ठभाग वाले हैं
- 166
अर्णवोदर
ॐ अर्णवोदराय नमः।
Om Arnavodaraya Namah।
सारे समुद्र जिनके उदर के जल हैं
- 167
कुक्षिस्थयक्षगन्धर्वरक्षःकिन्नरमानुष
ॐ कुक्षिस्थयक्षगन्धर्वरक्षःकिन्नरमानुषाय नमः।
Om Kukshisthayakshagandharvarakshahkinnaramanushaya Namah।
यक्ष, गन्धर्व, राक्षस, किन्नर और मनुष्य जिनकी नाड़ियाँ हैं
- 168
पृथ्विकटि
ॐ पृथ्विकटये नमः।
Om Prithvikataye Namah।
पृथ्वी जिनका कटिभाग अर्थात् कमर है
- 169
सृष्टिलिङ्ग
ॐ सृष्टिलिङ्गाय नमः।
Om Srishtilingaya Namah।
मैथुनी सृष्टि जिनकी जननेन्द्रिय के स्थान में है
- 170
शैलोरु
ॐ शैलोरवे नमः।
Om Shailorave Namah।
पर्वत जिनकी जाँघें हैं
- 171
दस्रजानुक
ॐ दस्रजानुकाय नमः।
Om Dasrajanukaya Namah।
दोनों अश्विनीकुमार जिनके दो घुटने हैं
- 172
पातालजङ्घ
ॐ पातालजङ्घाय नमः।
Om Patalajanghaya Namah।
सातों पाताल जिनकी पिंडलियों में हैं
- 173
मुनिपात्
ॐ मुनिपदे नमः।
Om Munipade Namah।
चरणों की सेवा में संलग्न मुनि ही जिनके चरण हैं
- 174
कालाङ्गुष्ठ
ॐ कालाङ्गुष्ठाय नमः।
Om Kalangushthaya Namah।
यम जिनके पैर का अँगूठा है
- 175
त्रयीतनु
ॐ त्रयीतनवे नमः।
Om Trayitanave Namah।
तीनों वेद जिनकी शेष देह के रूप में हैं
- 176
ज्योतिर्मण्डललाङ्गूल
ॐ ज्योतिर्मण्डललाङ्गूलाय नमः।
Om Jyotirmandalalangulaya Namah।
शिशुमार नामक तारों का समूह जिनकी पूँछ है
- 177
हृदयालाननिश्चल
ॐ हृदयालान-निश्चलाय नमः।
Om Hridayalana-nishchalaya Namah।
जो भक्तों के हृदयरूपी खम्भे में बधकर रहने वाले हैं
- 178
हृत्पद्मकर्णिकाशालिवियत्केलिसरोवर
ॐ हृत्पद्मकर्णिकाशालिवियत्केलिसरोवराय नमः।
Om Hritpadmakarnikashaliviyatkelisarovaraya Namah।
जो भक्तों के हृदयस्थल में क्रीडा का आनन्द लेने वाले हैं
- 179
सद्भक्तध्याननिगड
ॐ सद्भक्तध्याननिगडाय नमः।
Om Sadbhaktadhyananigadaya Namah।
जो श्रेष्ठ भक्तों के ध्यान रूपी बन्धन में बँध जाने वाले हैं
- 180
पूजावारिनिवारित
ॐ पूजावारिनिवारिताय नमः।
Om Pujavarinivaritaya Namah।
जो भक्तों की प्रार्थना से बँधे रहने वाले हैं
- 181
प्रतापी
ॐ प्रतापिने नमः।
Om Pratapine Namah।
जो अत्यन्त पराक्रमी हैं
- 182
कश्यपसुत
ॐ कश्यपसुताय नमः।
Om Kashyapasutaya Namah।
जो ऋषि कश्यप के पुत्र हैं
- 183
गणप
ॐ गणपाय नमः।
Om Ganapaya Namah।
जो होता, अध्वर्यु आदि गणों के रक्षक हैं
- 184
विष्टपी
ॐ विष्टपिने नमः।
Om Vishtapine Namah।
जो सभी भुवनों के आधार हैं
- 185
बली
ॐ बलिने नमः।
Om Baline Namah।
जो शक्तिशाली एवं बलिष्ठ हैं
- 186
यशस्वी
ॐ यशस्विने नमः।
Om Yashasvine Namah।
जो महान एवं कीर्तिमान हैं
- 187
धार्मिक
ॐ धार्मिकाय नमः।
Om Dharmikaya Namah।
जो धर्म-कर्म को प्रोत्साहित करने वाले हैं
- 188
स्वोजस्
ॐ स्वोजसे नमः।
Om Svojase Namah।
जो ओजपूर्ण व्यक्तित्व वाले हैं
- 189
प्रथम
ॐ प्रथमाय नमः।
Om Prathamaya Namah।
जो सभी शुभकार्यों में प्रथमपूज्य हैं
- 190
प्रथमेश्वर
ॐ प्रथमेश्वराय नमः।
Om Prathameshvaraya Namah।
जो त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु, महेश के स्वामी हैं
- 191
चिन्तामणिद्वीपपति
ॐ चिन्तामणिद्वीपपतये नमः।
Om Chintamanidvipapataye Namah।
जो चिन्तामणि नामक द्वीप के अधिपति हैं
- 192
कल्पद्रुमवनालय
ॐ कल्पद्रुमवनालयाय नमः।
Om Kalpadrumavanalayaya Namah।
जो कल्पवृक्षों के वन में निवास करने वाले हैं
- 193
रत्नमण्डपमध्यस्थ
ॐ रत्नमण्डपमध्यस्थाय नमः।
Om Ratnamandapamadhyasthaya Namah।
जो रत्नों से सुसज्जित मण्डप में विराजमान हैं
- 194
रत्नसिंहासनाश्रय
ॐ रत्नसिंहासनाश्रयाय नमः।
Om Ratnasimhasanashrayaya Namah।
जो रत्नसिंहासन पर आरूढ़ रहने वाले हैं
- 195
तीव्राशिरोद्धृतपद
ॐ तीव्राशिरोद्धृतपदाय नमः।
Om Tivrashiroddhritapadaya Namah।
जो तीव्रा नामक पीठ-शक्ति पर चरण रखने वाले हैं
- 196
ज्वालिनीमौलिलालित
ॐ ज्वालिनीमौलिलालिताय नमः।
Om Jvalinimaulilalitaya Namah।
ज्वालिनी नामक शक्ति जिनके चरणों का स्पर्श करके पूजन करती है
- 197
नन्दानन्दितपीठश्री
ॐ नन्दानन्दितपीठश्रिये नमः।
Om Nandananditapithashriye Namah।
जो नन्दा नामक शक्ति पर अनुग्रह करने वाले हैं
- 198
भोगदाभूषितासन
ॐ भोगदाभूषितासनाय नमः।
Om Bhogadabhushitasanaya Namah।
जो भोगदा नामक सिंहासन पर विराजमान हैं
- 199
सकामदायिनीपीठ
ॐ सकामदायिनीपीठाय नमः।
Om Sakamadayinipithaya Namah।
जो कामदायिनी पीठ पर विराजमान हैं
- 200
स्फुरदुग्रासनाश्रय
ॐ स्फुरदुग्रासनाश्रयाय नमः।
Om Sphuradugrasanashrayaya Namah।
जो उग्र आसन पर विराजने वाले हैं
- 201
तेजोवतीशिरोरत्न
ॐ तेजोवतीशिरोरत्नाय नमः।
Om Tejovatishiroratnaya Namah।
जो तेजोवती नामक शक्ति को रत्न के रूप धारण किये हुये हैं
- 202
सत्यानित्यावतंसित
ॐ सत्यानित्यावतंसिताय नमः।
Om Satyanityavatamsitaya Namah।
सत्या नामक शक्ति जिन्हें नित्य अपने मस्तक का आभूषण बनाये रखती है
- 203
सविघ्ननाशिनीपीठ
ॐ सविघ्ननाशिनीपीठाय नमः।
Om Savighnanashinipithaya Namah।
जो विघ्ननाशिनी नामक शक्ति पर विराजित हैं
- 204
सर्वशक्त्यम्बुजाश्रय
ॐ सर्वशक्त्यम्बुजाश्रयाय नमः।
Om Sarvashaktyambujashrayaya Namah।
जो सम्पूर्ण शक्तियों से युक्त कमल के आसन पर विराजमान हैं
- 205
लिपिपद्मासनाधार
ॐ लिपिपद्मासनाधाराय नमः।
Om Lipipadmasanadharaya Namah।
जो अक्षरों से सुसज्जित कमल पर सुशोभित होने वाले हैं
- 206
वह्निधामत्रयाश्रय
ॐ वह्निधामत्रयाश्रयाय नमः।
Om Vahnidhamatrayashrayaya Namah।
जो कमल पर बैठे सूर्य, चन्द्र और अग्नि नामक तीनों तेजोमण्डल में विद्यमान हैं
- 207
उन्नतप्रपद
ॐ उन्नतप्रपदाय नमः।
Om Unnataprapadaya Namah।
जिनके चरण का अग्रभाग कछुए के पीठ के समान ऊँचा है
- 208
गूढगुल्फ
ॐ गूढगुल्फाय नमः।
Om Gudhagulphaya Namah।
जिनके टखने मांस से छुपे हुये हैं
- 209
संवृतपार्ष्णिक
ॐ संवृतपार्ष्णिकाय नमः।
Om Samvritaparshnikaya Namah।
जिनके पैरों के तलवे अर्धवृत्ताकार हैं
- 210
पीनजङ्घ
ॐ पीनजङ्घाय नमः।
Om Pinajanghaya Namah।
जिनके टखने के नीचे का भाग मांसल है
- 211
श्लिष्टजानु
ॐ श्लिष्टजानवे नमः।
Om Shlishtajanave Namah।
जिनके दोनों घुटने स्पष्ट नहीं दिखायी देते हैं
- 212
स्थूलोरु
ॐ स्थूलोरवे नमः।
Om Sthulorave Namah।
जो मोटी जङ्घा वाले हैं
- 213
प्रोन्नमत्कटि
ॐ प्रोन्नमत्कटये नमः।
Om Pronnamatkataye Namah।
जो ऊँचे कटिभाग अर्थात् कमर वाले हैं
- 214
निम्ननाभि
ॐ निम्ननाभये नमः।
Om Nimnanabhaye Namah।
जो अत्यन्त गहरी नाभि वाले हैं
- 215
स्थूलकुक्षि
ॐ स्थूलकुक्षये नमः।
Om Sthulakukshaye Namah।
जो विशाल उदर वाले हैं
- 216
पीनवक्षा
ॐ पीनवक्षसे नमः।
Om Pinavakshase Namah।
जो सुदृढ़ वक्षस्थल वाले हैं
- 217
बृहद्भुज
ॐ बृहद्भुजाय नमः।
Om Brihadbhujaya Namah।
जो बड़ी भुजाओं वाले हैं
- 218
पीनस्कन्ध
ॐ पीनस्कन्धाय नमः।
Om Pinaskandhaya Namah।
जो बलिष्ठ कन्धों वाले हैं
- 219
कम्बुकण्ठ
ॐ कम्बुकण्ठाय नमः।
Om Kambukanthaya Namah।
जो दक्षिणावर्ती शंख के समान गर्दन वाले हैं
- 220
लम्बोष्ठ
ॐ लम्बोष्ठाय नमः।
Om Lamboshthaya Namah।
जो लटकते हुये ओठों वाले हैं
- 221
लम्बनासिक
ॐ लम्बनासिकाय नमः।
Om Lambanasikaya Namah।
जो लम्बी नासिका (सूँड) वाले हैं
- 222
भग्नवामरद
ॐ भग्नवामरदाय नमः।
Om Bhagnavamaradaya Namah।
जिनके बायें दाँत का अग्रभाग टूट हुआ है
- 223
तुङ्गसव्यदन्त
ॐ तुङ्गसव्यदन्ताय नमः।
Om Tungasavyadantaya Namah।
जिनका दाहिना दाँत ऊँचा है
- 224
महाहनु
ॐ महाहनवे नमः।
Om Mahahanave Namah।
जिनकी ठोड़ी अत्यधिक विशाल है
- 225
ह्रस्वनेत्रत्रय
ॐ ह्रस्वनेत्रत्रयाय नमः।
Om Hrasvanetratrayaya Namah।
जो छोटे-छोटे तीन नेत्रों वाले हैं
- 226
शूर्पकर्ण
ॐ शूर्पकर्णाय नमः।
Om Shurpakarnaya Namah।
जो सूप के समान विशाल कानों वाले हैं
- 227
निबिडमस्तक
ॐ निबिडमस्तकाय नमः।
Om Nibidamastakaya Namah।
जो कठोर मस्तक वाले हैं
- 228
स्तबकाकारकुम्भाग्र
ॐ स्तबकाकारकुम्भाग्राय नमः।
Om Stabakakarakumbhagraya Namah।
जिनके मस्तक का अग्रभाग पुष्पों के गुच्छे के समान है
- 229
रत्नमौलि
ॐ रत्नमौलये नमः।
Om Ratnamaulaye Namah।
जो रत्न जड़ित मुकुट धारण करने वाले हैं
- 230
निरङ्कुश
ॐ निरङ्कुशाय नमः।
Om Nirankushaya Namah।
जो परम स्वतन्त्र हैं
- 231
सर्पहारकटीसूत्र
ॐ सर्पहारकटीसूत्राय नमः।
Om Sarpaharakatisutraya Namah।
जो सर्पाकार हार और कटिसूत्र धारण करने वाले हैं
- 232
सर्पयज्ञोपवीतवान्
ॐ सर्पयज्ञोपवीतवते नमः।
Om Sarpayajnopavitavate Namah।
जो सर्पाकार यज्ञोपवीत धारण करने वाले हैं
- 233
सर्पकोटीरकटक
ॐ सर्पकोटीरकटकाय नमः।
Om Sarpakotirakatakaya Namah।
जो सर्प को मुकुट व कँगन के रूप में धारण करने वाले हैं
- 234
सर्पग्रैवेयकाङ्गद
ॐ सर्पग्रैवेयकाङ्गदाय नमः।
Om Sarpagraiveyakangadaya Namah।
जो सर्प को हार एवं बाजूबन्द के रूप में धारण करने वाले हैं
- 235
सर्पकक्ष्योदराबन्ध
ॐ सर्पकक्ष्योदराबन्धाय नमः।
Om Sarpakakshyodarabandhaya Namah।
जो सर्प को करधनी के रूप में धारण करने वाले हैं
- 236
सर्पराजोत्तरीयक
ॐ सर्पराजोत्तरीयकाय नमः।
Om Sarparajottariyakaya Namah।
जो नागराज वासुकि को उत्तरीय वस्त्र के रूप में धारण करने वाले हैं
- 237
रक्त
ॐ रक्ताय नमः।
Om Raktaya Namah।
जो रक्तवर्ण वाले हैं
- 238
रक्ताम्बरधर
ॐ रक्ताम्बरधराय नमः।
Om Raktambaradharaya Namah।
जो लाल रंग के वस्त्र धारण करने वाले हैं
- 239
रक्तमाल्यविभूषण
ॐ रक्तमाल्यविभूषणाय नमः।
Om Raktamalyavibhushanaya Namah।
जो लाल रंग की पुष्पों की माला एवं आभूषण धारण करने वाले हैं
- 240
रक्तेक्षण
ॐ रक्तेक्षणाय नमः।
Om Raktekshanaya Namah।
जो लाल नेत्रों वाले हैं
- 241
रक्तकर
ॐ रक्तकराय नमः।
Om Raktakaraya Namah।
जो लाल हाथों वाले हैं
- 242
रक्तताल्वोष्ठपल्लव
ॐ रक्तताल्वोष्ठपल्लवाय नमः।
Om Raktatalvoshthapallavaya Namah।
जो लाल गालों एवं ओठों वाले हैं
- 243
श्वेत
ॐ श्वेताय नमः।
Om Shvetaya Namah।
जो श्वेतवर्ण वाले हैं
- 244
श्वेताम्बरधर
ॐ श्वेताम्बरधराय नमः।
Om Shvetambaradharaya Namah।
जो श्वेत वस्त्र धारण करने वाले हैं
- 245
श्वेतमाल्यविभूषण
ॐ श्वेतमाल्यविभूषणाय नमः।
Om Shvetamalyavibhushanaya Namah।
जो श्वेत माला एवं श्वेत आभूषणों से सुशोभित हैं
- 246
श्वेतातपत्ररुचिर
ॐ श्वेतातपत्ररुचिराय नमः।
Om Shvetatapatraruchiraya Namah।
जो श्वेत छत्र के नीचे विराजमान हैं
- 247
श्वेतचामरवीजित
ॐ श्वेतचामरवीजिताय नमः।
Om Shvetachamaravijitaya Namah।
जिनकी श्वेत चँवर डुलाकर सेवा की जाती है
- 248
सर्वावयवसम्पूर्णसर्वलक्षणलक्षित
ॐ सर्वावयवसम्पूर्णसर्वलक्षणलक्षिताय नमः।
Om Sarvavayavasampurnasarvalakshanalakshitaya Namah।
जो सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार शुभ लक्षणों से पूर्ण हैं
- 249
सर्वाभरणशोभाढ्य
ॐ सर्वाभरणशोभाढ्याय नमः।
Om Sarvabharanashobhadhyaya Namah।
जो सम्पूर्ण आभूषणों की शोभा से सम्पन्न हैं
- 250
सर्वशोभासमन्वित
ॐ सर्वशोभासमन्विताय नमः।
Om Sarvashobhasamanvitaya Namah।
जो लावण्य नामक सम्पूर्ण अंगकान्ति से शोभायमान हैं
- 251
सर्वमङ्गलमाङ्गल्य
ॐ सर्वमङ्गलमाङ्गल्याय नमः।
Om Sarvamangalamangalyaya Namah।
जो समस्त मंगलों के लिये मंगलकारी हैं
- 252
सर्वकारणकारण
ॐ सर्वकारणकारणाय नमः।
Om Sarvakaranakaranaya Namah।
जो समस्त कारणों के कारण हैं
- 253
सर्वदैककर
ॐ सर्वदैककराय नमः।
Om Sarvadaikakaraya Namah।
जो उदार हस्त वाले हैं
- 254
शार्ङ्गी
ॐ शार्ङ्गिणे नमः।
Om Sharngine Namah।
जो शार्ङ्गी धनुष धारण करने वाले हैं
- 255
बीजापूरी
ॐ बीजापूरिणे नमः।
Om Bijapurine Namah।
जो हाथ में अनार धारण करने वाले हैं
- 256
गदाधर
ॐ गदाधराय नमः।
Om Gadadharaya Namah।
जो गदाधारी हैं
- 257
इक्षुचापधर
ॐ इक्षुचापधराय नमः।
Om Ikshuchapadharaya Namah।
जो गन्ने का धनुष धारण करने वाले हैं
- 258
शूली
ॐ शूलिने नमः।
Om Shuline Namah।
जो त्रिशूल धारण करने वाले हैं
- 259
चक्रपाणि
ॐ चक्रपाणये नमः।
Om Chakrapanaye Namah।
जो हाथ में चक्र धारण करने वाले हैं
- 260
सरोजभृत्
ॐ सरोजभृते नमः।
Om Sarojabhrite Namah।
जो हाथ में कमल पुष्प धारण करने वाले हैं
- 261
पाशी
ॐ पाशिने नमः।
Om Pashine Namah।
जो हाथ में पाश धारण करने वाले हैं
- 262
धृतोत्पल
ॐ धृतोत्पलाय नमः।
Om Dhritotpalaya Namah।
जो हाथ में उत्पल अर्थात् नील कमल पुष्प धारण करने वाले हैं
- 263
शालीमञ्जरीभृत्
ॐ शालीमञ्जरीभृते नमः।
Om Shalimanjaribhrite Namah।
जो हाथ में धान की बाली धारण करने वाले हैं
- 264
स्वदन्तभृत्
ॐ स्वदन्तभृते नमः।
Om Svadantabhrite Namah।
जो हाथ में स्वयं का खण्डित दाँत धारण करने वाले हैं
- 265
कल्पवल्लीधर
ॐ कल्पवल्लीधराय नमः।
Om Kalpavallidharaya Namah।
जो हाथ में कल्पलता रखने वाले हैं
- 266
विश्वाभयदैककर
ॐ विश्वाभयदैककराय नमः।
Om Vishvabhayadaikakaraya Namah।
जो सम्पूर्ण विश्व में भक्तों का भय नष्ट करने वाले हैं
- 267
वशी
ॐ वशिने नमः।
Om Vashine Namah।
जो सम्पूर्ण विश्व को वश में रखने वाले हैं
- 268
अक्षमालाधर
ॐ अक्षमालाधराय नमः।
Om Akshamaladharaya Namah।
जो अक्षमाला धारण करने वाले हैं
- 269
ज्ञानमुद्रावान्
ॐ ज्ञानमुद्रावते नमः।
Om Jnanamudravate Namah।
जो ज्ञान के सूचक हैं
- 270
मुद्गरायुध
ॐ मुद्गरायुधाय नमः।
Om Mudgarayudhaya Namah।
जो मुद्गर को शस्त्र के रूप में धारण करने वाले हैं
- 271
पूर्णपात्री
ॐ पूर्णपात्रिणे नमः।
Om Purnapatrine Namah।
जो अमृत से भरे पात्र को धारण करने वाले हैं
- 272
कम्बुधर
ॐ कम्बुधराय नमः।
Om Kambudharaya Namah।
जो शंख धारण करने वाले हैं
- 273
विधृतालिसमुद्गक
ॐ विधृतालिसमुद्गकाय नमः।
Om Vidhritalisamudgakaya Namah।
जो जिनके गालों पर बहता शहद भ्रमरों को आकर्षित कर रहा है
- 274
मातुलिङ्गधर
ॐ मातुलिङ्गधराय नमः।
Om Matulingadharaya Namah।
जिनके हाथ में मातुलिङ्ग फल अर्थात् बिजौरा नींबू है
- 275
चूतकलिकाभृत्
ॐ चूतकलिकाभृते नमः।
Om Chutakalikabhrite Namah।
जो आम के पल्लव धारण करने वाले हैं
- 276
कुठारवान्
ॐ कुठारवते नमः।
Om Kutharavate Namah।
जो कुठार धारण करने वाले हैं
- 277
पुष्करस्थस्वर्णघटीपूर्णरत्नाभिवर्षक
ॐ पुष्करस्थस्वर्णघटीपूर्णरत्नाभिवर्षकाय नमः।
Om Pushkarasthasvarnaghatipurnaratnabhivarshakaya Namah।
जिनके हाथ में रत्नों के स्वर्ण पात्र हैं
- 278
भारतीसुन्दरीनाथ
ॐ भारतीसुन्दरीनाथाय नमः।
Om Bharatisundarinathaya Namah।
जो देवी सरस्वती गौरी एवं लक्ष्मी के साथ विराजमान हैं
- 279
विनायकरतिप्रिय
ॐ विनायकरतिप्रियाय नमः।
Om Vinayakaratipriyaya Namah।
जो अपने गणों के साथ खेलने में रुचि रखने वाले हैं
- 280
महालक्ष्मीप्रियतम
ॐ महालक्ष्मीप्रियतमाय नमः।
Om Mahalakshmipriyatamaya Namah।
जो महालक्ष्मी के प्रिय हैं
- 281
सिद्धलक्ष्मीमनोरम
ॐ सिद्धलक्ष्मीमनोरमाय नमः।
Om Siddhalakshmimanoramaya Namah।
जो सिद्धलक्ष्मी को मोहित करने वाले हैं
- 282
रमारमेशपूर्वाङ्ग
ॐ रमारमेशपूर्वाङ्गाय नमः।
Om Ramarameshapurvangaya Namah।
जिनके सम्मुख श्री लक्ष्मी तथा विष्णु जी विराजमान हैं
- 283
दक्षिणोमामहेश्वर
ॐ दक्षिणोमामहेश्वराय नमः।
Om Dakshinomamaheshvaraya Namah।
जो देवी उमा और महेश्वर को अपने दक्षिणभाग में स्थापित करने वाले हैं
- 284
महीवराहवामाङ्ग
ॐ महीवराहवामाङ्गाय नमः।
Om Mahivarahavamangaya Namah।
जो श्री भूमिदेवी एवं वराह देव को अपने बाये भाग या उत्तर दिशा में रखने वाले हैं
- 285
रतिकन्दर्पपश्चिम
ॐ रतिकन्दर्पपश्चिमाय नमः।
Om Ratikandarpapashchimaya Namah।
जो रति और कामदेव को अपने पीछे या पश्चिम दिशा में रखने वाले हैं
- 286
आमोदप्रमोदजनन
ॐ आमोदमोदजननाय नमः।
Om Amodamodajananaya Namah।
जो आमोद अर्थात् हर्ष को भी हर्ष देने वाले हैं
- 287
सप्रमोदप्रमोदन
ॐ सप्रमोदप्रमोदनाय नमः।
Om Sapramodapramodanaya Namah।
जो प्रमोद अर्थात् सुख को भी सुख देने वाले हैं
- 288
समेधितसमृद्धिश्री
ॐ समेधितसमृद्धिश्रिये नमः।
Om Samedhitasamriddhishriye Namah।
जो देवी समृद्धि को समृद्धि प्रदान करने वाले हैं
- 289
ऋद्धिसिद्धिप्रवर्तक
ॐ ऋद्धिसिद्धिप्रवर्तकाय नमः।
Om Riddhisiddhipravartakaya Namah।
जो ऋद्धि देवी में स्थित सिद्धि के प्रवर्तक हैं
- 290
दत्तसौमुख्यसुमुख
ॐ दत्तसौमुख्यसुमुखाय नमः।
Om Dattasaumukhyasumukhaya Namah।
जो सुमुख को सुमुखता प्रदान करने वाले हैं
- 291
कान्तिकन्दलिताश्रय
ॐ कान्तिकन्दलिताश्रयाय नमः।
Om Kantikandalitashrayaya Namah।
जो कान्ति देवी के आश्रय स्थान को अंकुरित करने वाले हैं
- 292
मदनावत्याश्रिताङ्घ्रि
ॐ मदनावत्याश्रिताङ्घ्रये नमः।
Om Madanavatyashritanghraye Namah।
जो मदनावती देवी द्वारा पूजे जाने वाले हैं
- 293
कृत्तदौर्मुख्यदुर्मुख
ॐ कृत्तदौर्मुख्यदुर्मुखाय नमः।
Om Krittadaurmukhyadurmukhaya Namah।
जो दुर्मुख की दुर्मुखता को काट फेंकने वाले हैं
- 294
विघ्नसम्पल्लवोपघ्न
ॐ विघ्न-सम्पल्लवोपघ्नाय नमः।
Om Vighna-sampallavopaghnaya Namah।
जो विघ्नों के निवारक हैं
- 295
सेवोन्निद्रमदद्रव
ॐ सेवोन्निद्र-मदद्रवाय नमः।
Om Sevonnidra-madadravaya Namah।
जो देवी मदद्रवा द्वारा पूजे जाने वाले हैं
- 296
विघ्नकृन्निघ्नचरण
ॐ विघ्नकृन्निघ्नचरणाय नमः।
Om Vighnakrinnighnacharanaya Namah।
विघ्नकृत भक्तिभाव से जिनके चरणों को अपने अधीन करके रखा है
- 297
द्राविणीशक्तिसत्कृत
ॐ द्राविणीशक्तिसत्कृताय नमः।
Om Dravinishaktisatkritaya Namah।
जो द्राविणी नामक शक्ति द्वारा सम्मानित हैं
- 298
तीव्राप्रसन्ननयन
ॐ तीव्राप्रसन्ननयनाय नमः।
Om Tivraprasannanayanaya Namah।
जो तीव्रा नामक शक्ति के प्रति अत्यन्त प्रसन्न रहते हैं
- 299
ज्वालिनीपालितैकदृक्
ॐ ज्वालिनीपालितैकदृशे नमः।
Om Jvalinipalitaikadrishe Namah।
जिनकी मुख्य दृष्टि ज्वालिनी-शक्ति के संरक्षण में संलग्न है
- 300
मोहिनीमोहन
ॐ मोहिनीमोहनाय नमः।
Om Mohinimohanaya Namah।
जो मोहिनी शक्ति को भी मोहित करने वाले हैं
- 301
भोगदायिनीकान्तिमण्डित
ॐ भोगदायिनीकान्तिमण्डिताय नमः।
Om Bhogadayinikantimanditaya Namah।
जो भोगदायिनी शक्ति की कान्ति से मण्डित चरणपादुका वाले हैं
- 302
कामिनीकान्तवक्त्रश्री
ॐ कामिनीकान्तवक्त्रश्रिये नमः।
Om Kaminikantavaktrashriye Namah।
जो कामदायिनी नामक शक्ति के मुख की शोभा को बढ़ाने वाले हैं
- 303
अधिष्ठितवसुन्धर
ॐ अधिष्ठितवसुन्धराय नमः।
Om Adhishthitavasundharaya Namah।
जो देवी वसुन्धरा के आधार हैं
- 304
वसुन्धरामदोन्नद्धमहाशङ्खनिधिप्रभु
ॐ वसुन्धरामदोन्नद्धमहाशङ्खनिधिप्रभवे नमः।
Om Vasundharamadonnaddhamahashankhanidhiprabhave Namah।
जो पत्नी वसुन्धरा के साथ प्रसन्न रहने वाले महाशंख निधि के स्वामी हैं
- 305
नमद्वसुमतीमौलिमहापद्मनिधिप्रभु
ॐ नमद्वसुमतीमौलिमहापद्मनिधिप्रभवे नमः।
Om Namadvasumatimaulimahapadmanidhiprabhave Namah।
जो वसुमती एवं महापद्म द्वारा पूजनीय हैं
- 306
सर्वसद्गुरुसंसेव्य
ॐ सर्वसद्गुरुसंसेव्याय नमः।
Om Sarvasadgurusamsevyaya Namah।
जो समस्त गुरुओं द्वारा पूजे जाने वाले हैं
- 307
शोचिष्केशहृदाश्रय
ॐ शोचिष्केशहृदाश्रयाय नमः।
Om Shochishkeshahridashrayaya Namah।
जो गार्हपत्य आदि पाँच अग्नियों के हृदय में ध्येयरूप से विराजमान हैं
- 308
ईशानमूर्द्धा
ॐ ईशानमूर्ध्ने नमः।
Om Ishanamurdhne Namah।
जो भगवान शंकर के माननीय हैं
- 309
देवेन्द्रशिखा
ॐ देवेन्द्रशिखायै नमः।
Om Devendrashikhayai Namah।
जो देवराज इन्द्र के आराध्य हैं
- 310
पवननन्दन
ॐ पवननन्दनाय नमः।
Om Pavananandanaya Namah।
जो वायु को आनन्दित करने वाले हैं
- 311
अग्रप्रत्यग्रनयन
ॐ अग्रप्रत्यग्रनयनाय नमः।
Om Agrapratyagranayanaya Namah।
जो सूक्ष्म एवं नूतन दृष्टि वाले हैं
- 312
दिव्यास्त्र प्रयोगवित्
ॐ दिव्यास्त्राणां प्रयोगविदे नमः।
Om Divyastranam Prayogavide Namah।
जो दिव्य अस्त्रों के प्रयोग को जानने वाले हैं
- 313
ऐरावतादिसर्वाशावारणावरणप्रिय
ॐ ऐरावतादिसर्वाशावारणावरणप्रियाय नमः।
Om Airavatadisarvashavaranavaranapriyaya Namah।
जिन्हें खेल-खेल में ऐरावत आदि हाथियों को ढँक लेना प्रिय लगता है
- 314
वज्राद्यस्त्रपरिवार
ॐ वज्राद्यस्त्रपरिवाराय नमः।
Om Vajradyastraparivaraya Namah।
जो वज्र आदि अस्त्रों तथा इन्द्र आदि दिक्पालों से आवृत हैं
- 315
गणचण्डसमाश्रय
ॐ गणचण्डसमाश्रयाय नमः।
Om Ganachandasamashrayaya Namah।
जो चण्ड आदि गणों को बल प्रदान करने वाले हैं
- 316
जयाजयापरीवार
ॐ जयाजयापरीवाराय नमः।
Om Jayajayaparivaraya Namah।
जो जया और अजया नामक पीठशक्तियों से घिरे हुए हैं
- 317
विजयाविजयावह
ॐ विजयाविजयावहाय नमः।
Om Vijayavijayavahaya Namah।
जो विजया नामक पीठशक्ति को विजय प्रदान करने वाले हैं
- 318
अजितार्चितपादाब्ज
ॐ अजितार्चितपादाब्जाय नमः।
Om Ajitarchitapadabjaya Namah।
जो जिनके चरण कमल अपराजिता शक्ति द्वारा पूजे जाते हैं
- 319
नित्यानित्यावतंसित
ॐ नित्यानित्यावतंसिताय नमः।
Om Nityanityavatamsitaya Namah।
नित्या नाम की शक्ति नित्य जिनके चरणकमलों की सेवा में उपस्थित है
- 320
विलासिनीकृतोल्लास
ॐ विलासिनीकृतोल्लासाय नमः।
Om Vilasinikritollasaya Namah।
जो विलासिनी की सेवा से प्रसन्न होने वाले हैं
- 321
शौण्डीसौन्दर्यमण्डित
ॐ शौण्डीसौन्दर्यमण्डिताय नमः।
Om Shaundisaundaryamanditaya Namah।
जो शौण्डी शक्ति के सौन्दर्य में वृद्धि करने वाले हैं
- 322
अनन्तानन्तसुखद
ॐ अनन्तानन्तसुखदाय नमः।
Om Anantanantasukhadaya Namah।
जो अनन्ता नामक शक्ति को अनन्त सुख प्रदान करने वाले हैं
- 323
सुमङ्गलसुमङ्गल
ॐ सुमङ्गलसुमङ्गलाय नमः।
Om Sumangalasumangalaya Namah।
जिनके कारण सुमंगल नामक पीठ भी मंगलयुक्त हो जाता है
- 324
इच्छाशक्तिज्ञानशक्तिक्रियाशक्तिनिषेवित
ॐ इच्छाशक्तिज्ञानशक्तिक्रियाशक्तिनिषेविताय नमः।
Om Ichchhashaktijnanashaktikriyashaktinishevitaya Namah।
जो इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति, एवं क्रियाशक्ति द्वारा सेवित हैं
- 325
सुभगासंश्रितपद
ॐ सुभगासंश्रितपदाय नमः।
Om Subhagasamshritapadaya Namah।
जो सुभगा देवी के द्वारा सेवित चरणकमल वाले हैं
- 326
ललिताललिताश्रय
ॐ ललिताललिताश्रयाय नमः।
Om Lalitalalitashrayaya Namah।
जो ललिता देवी के मनोरम आश्रय हैं
- 327
कामिनीकामन
ॐ कामिनीकामनाय नमः।
Om Kaminikamanaya Namah।
जो कामकला नामक शक्ति की कामना रखने वाले हैं
- 328
काममालिनीकेलिलालित
ॐ काममालिनीकेलिलालिताय नमः।
Om Kamamalinikelilalitaya Namah।
जो काममालिनी नामक शक्ति की क्रीडाओं द्वारा प्रसन्न किये गये हैं
- 329
सरस्वत्याश्रय
ॐ सरस्वत्याश्रयाय नमः।
Om Sarasvatyashrayaya Namah।
जो देवी सरस्वती के आश्रय हैं
- 330
गौरीनन्दन
ॐ गौरीनन्दनाय नमः।
Om Gaurinandanaya Namah।
जो माता पार्वती को आनन्द प्रदान करने वाले हैं
- 331
श्रीनिकेतन
ॐ श्रीनिकेतनाय नमः।
Om Shriniketanaya Namah।
जो देवी लक्ष्मी के निवासस्थान हैं
- 332
गुरुगुप्तपद
ॐ गुरुगुप्तपदाय नमः।
Om Guruguptapadaya Namah।
जिनके चरण गुरुओं द्वारा आलिङ्गन के कारण ढँके हुए हैं
- 333
वाचासिद्ध
ॐ वाचासिद्धाय नमः।
Om Vachasiddhaya Namah।
जिनकी भक्ति से वाक्-सिद्धि प्राप्त होती है
- 334
वागीश्वरीपति
ॐ वागीश्वरीपतये नमः।
Om Vagishvaripataye Namah।
जो वागीश्वरी अर्थात् नकुली नामक शक्ति के प्रियतम हैं
- 335
नलिनीकामुक
ॐ नलिनीकामुकाय नमः।
Om Nalinikamukaya Namah।
जो नलिनी अर्थात् सुरापगा नामक शक्ति के प्रियतम हैं
- 336
वामाराम
ॐ वामारामाय नमः।
Om Vamaramaya Namah।
वामा नामक शक्ति जिनकी प्रिया हैं
- 337
ज्येष्ठामनोरम
ॐ ज्येष्ठामनोरमाय नमः।
Om Jyeshthamanoramaya Namah।
ज्येष्ठा नामक शक्ति जिनकी मनोरमा हैं
- 338
रौद्रीमुद्रितपादाब्ज
ॐ रौद्रीमुद्रितपादाब्जाय नमः।
Om Raudrimudritapadabjaya Namah।
रौद्री नामक शक्ति जिनके चरणों को अपनी अंजलि में बाँधे रखती हैं
- 339
हुंबीज
ॐ हुंबीजाय नमः।
Om Humbijaya Namah।
हुम् जिनका बीज मन्त्र है
- 340
तुङ्गशक्तिक
ॐ तुङ्गशक्तिकाय नमः।
Om Tungashaktikaya Namah।
जो अनन्त शक्ति वाले हैं
- 341
विश्वादिजननत्राण
ॐ विश्वादिजननत्राणाय नमः।
Om Vishvadijananatranaya Namah।
जो विश्व के आदिभूत हिरण्यगर्भ के जन्म और पालन के कारण हैं
- 342
स्वाहाशक्ति
ॐ स्वाहाशक्तये नमः।
Om Svahashaktaye Namah।
साक्षात् स्वाहा जिनकी शक्ति हैं
- 343
सकीलक
ॐ सकीलकाय नमः।
Om Sakilakaya Namah।
जो कीलक से युक्त हैं
- 344
अमृताब्धिकृतावास
ॐ अमृताब्धिकृतावासाय नमः।
Om Amritabdhikritavasaya Namah।
जो अमृत के सागर में निवास करने वाले हैं
- 345
मदघूर्णितलोचन
ॐ मदघूर्णितलोचनाय नमः।
Om Madaghurnitalochanaya Namah।
जो सजल नेत्रों वाले हैं
- 346
उच्छिष्टगण
ॐ उच्छिष्टगणाय नमः।
Om Uchchhishtaganaya Namah।
जो उत्कृष्ट और शिष्ट गणों के स्वामी हैं
- 347
उच्छिष्टगणेश
ॐ उच्छिष्टगणेशाय नमः।
Om Uchchhishtaganeshaya Namah।
जो सतत मोदक-भक्षण करने वाले हैं
- 348
गणनायक
ॐ गणनायकाय नमः।
Om Gananayakaya Namah।
जिनके गणों की गणना भक्तों द्वारा होती रहती है
- 349
सार्वकालिकसंसिद्धि
ॐ सार्वकालिकसंसिद्धये नमः।
Om Sarvakalikasamsiddhaye Namah।
जो सर्वदा सिद्धियों से युक्त रहते हैं
- 350
नित्यशैव
ॐ नित्यशैवाय नमः।
Om Nityashaivaya Namah।
जो निरन्तर शिव का ध्यान करने वाले हैं
- 351
दिगम्बर
ॐ दिगम्बराय नमः।
Om Digambaraya Namah।
जो समस्त दिशाओं को वस्त्र के रूप में धारण करने वाले हैं
- 352
अनपाय
ॐ अनपायाय नमः।
Om Anapayaya Namah।
जो अनन्त-अविनाशी हैं
- 353
अनन्तदृष्टि
ॐ अनन्तदृष्टये नमः।
Om Anantadrishtaye Namah।
जो असीम ज्ञानशक्ति से सम्पन्न हैं
- 354
अप्रमेय
ॐ अप्रमेयाय नमः।
Om Aprameyaya Namah।
जो वाणी, मन एवं ज्ञानेन्द्रियों से अगम्य होने के कारण प्रमाणातीत हैं
- 355
अजरामर
ॐ अजरामराय नमः।
Om Ajaramaraya Namah।
जो जरा और मृत्यु से रहित हैं
- 356
अनाविल
ॐ अनाविलाय नमः।
Om Anavilaya Namah।
जो अत्यन्त शुद्ध हैं
- 357
अप्रतिरथ
ॐ अप्रतिरथाय नमः।
Om Apratirathaya Namah।
जो अतुलनीय हैं
- 358
अच्युत
ॐ अच्युताय नमः।
Om Achyutaya Namah।
जो मर्यादा से कभी च्युत अर्थात् विचलित न होने वाले हैं
- 359
अमृत
ॐ अमृताय नमः।
Om Amritaya Namah।
जो अमृत के समान हैं
- 360
अक्षर
ॐ अक्षराय नमः।
Om Aksharaya Namah।
जो सर्वव्यापी हैं
- 361
अप्रतर्क्य
ॐ अप्रतर्क्याय नमः।
Om Apratarkyaya Namah।
जिन्हें शब्दों से परिभाषित न किया जा सके
- 362
अक्षय
ॐ अक्षयाय नमः।
Om Akshayaya Namah।
जो अजर-अमर हैं
- 363
अजय्य
ॐ अजय्याय नमः।
Om Ajayyaya Namah।
जो अजेय हैं
- 364
अनाधार
ॐ अनाधाराय नमः।
Om Anadharaya Namah।
जिन्हें किसी आधार की अवश्यकता नहीं है
- 365
अनामय
ॐ अनामयाय नमः।
Om Anamayaya Namah।
जो समस्त रोगों से मुक्त हैं
- 366
अमल
ॐ अमलाय नमः।
Om Amalaya Namah।
जो मलिनता से रहित हैं
- 367
अमोघसिद्धि
ॐ अमोघसिद्धये नमः।
Om Amoghasiddhaye Namah।
जो अचूक सिद्धि वाले हैं
- 368
अद्वैत
ॐ अद्वैताय नमः।
Om Advaitaya Namah।
जो स्वयं अद्वैत हैं
- 369
अघोर
ॐ अघोराय नमः।
Om Aghoraya Namah।
जो शिव-स्वरूप हैं
- 370
अप्रमितानन
ॐ अप्रमिताननाय नमः।
Om Apramitananaya Namah।
जो अनन्त मुख वाले हैं
- 371
अनाकार
ॐ अनाकाराय नमः।
Om Anakaraya Namah।
जो आकार रहित अर्थात् निराकार ब्रह्म हैं
- 372
अब्धिभूम्यग्निबलघ्न
ॐ अब्धिभूम्यग्निबलघ्नाय नमः।
Om Abdhibhumyagnibalaghnaya Namah।
जो पृथ्वी, समुद्र एवं अग्नि की शक्ति को नष्ट करने वाले हैं
- 373
अव्यक्तलक्षण
ॐ अव्यक्तलक्षणाय नमः।
Om Avyaktalakshanaya Namah।
जो सामान्य मानव की बुद्धि द्वारा अभिव्यक्त नहीं हो सकते
- 374
आधारपीठ
ॐ आधारपीठाय नमः।
Om Adharapithaya Namah।
जो पृथ्वी से लेकर शिवपर्यन्त छत्तीस आधारभूत तत्त्वों के भी आश्रय हैं
- 375
आधार
ॐ आधाराय नमः।
Om Adharaya Namah।
जो विष्णु तथा ब्रह्मा को भी धारण करने वाले हैं
- 376
आधाराधेयवर्जित
ॐ आधाराधेयवर्जिताय नमः।
Om Adharadheyavarjitaya Namah।
जो अद्वैत स्वरूप हैं
- 377
आखुकेतन
ॐ आखुकेतनाय नमः।
Om Akhuketanaya Namah।
जिनके ध्वज पर मूषक का चिन्ह अंकित है
- 378
आशापूरक
ॐ आशापूरकाय नमः।
Om Ashapurakaya Namah।
जो सबकी आशा पूर्ण करने वाले हैं
- 379
आखुमहारथ
ॐ आखुमहारथाय नमः।
Om Akhumaharathaya Namah।
जो मूषकरूपी महान् रथ अर्थात् वाहन से युक्त हैं
- 380
इक्षुसागरमध्यस्थ
ॐ इक्षुसागरमध्यस्थाय नमः।
Om Ikshusagaramadhyasthaya Namah।
जो गन्ने के रस के सागर के मध्य विरजमान हैं
- 381
इक्षुभक्षणलालस
ॐ इक्षुभक्षणलालसाय नमः।
Om Ikshubhakshanalalasaya Namah।
जिन्हें गन्ना का सेवन करना अत्यन्त प्रिय है
- 382
इक्षुचापातिरेकश्री
ॐ इक्षुचापातिरेकश्रिये नमः।
Om Ikshuchapatirekashriye Namah।
जो मन्मथ अर्थात् कामदेव से भी अधिक सुन्दर हैं
- 383
इक्षुचापनिषेवित
ॐ इक्षुचापनिषेविताय नमः।
Om Ikshuchapanishevitaya Namah।
कामदेव जिनकी पुजा करते हैं
- 384
इन्द्रगोपसमानश्री
ॐ इन्द्रगोपसमानश्रिये नमः।
Om Indragopasamanashriye Namah।
जो इन्द्रगोप नामक कीट के समान वर्ण वाले हैं
- 385
इन्द्रनीलसमद्युति
ॐ इन्द्रनीलसमद्युतये नमः।
Om Indranilasamadyutaye Namah।
जो नीलमणि के समान श्याम कान्ति वाले हैं
- 386
इन्दीवरदलश्याम
ॐ इन्दीवरदलश्यामाय नमः।
Om Indivaradalashyamaya Namah।
जो नीलकमल के समान श्याम वर्ण वाले हैं
- 387
इन्दुमण्डलनिर्मल
ॐ इन्दुमण्डलनिर्मलाय नमः।
Om Indumandalanirmalaya Namah।
जो चन्द्रमा के समान गौर कान्ति वाले हैं
- 388
इध्मप्रिय
ॐ इध्मप्रियाय नमः।
Om Idhmapriyaya Namah।
जिनको हवन की समिधा प्रिय है
- 389
इडाभाग
ॐ इडाभागाय नमः।
Om Idabhagaya Namah।
जो ऋत्विक्, यजमान आदि रूप में यज्ञ में भाग लेने वाले हैं
- 390
इराधाम
ॐ इराधाम्ने नमः।
Om Iradhamne Namah।
जिनके धाम में पृथ्वी निवास करती हैं
- 391
इन्दिराप्रिय
ॐ इन्दिराप्रियाय नमः।
Om Indirapriyaya Namah।
जो देवी लक्ष्मी को प्रिय हैं
- 392
इक्ष्वाकुविघ्नविध्वंसी
ॐ इक्ष्वाकुविघ्नविध्वंसिने नमः।
Om Ikshvakuvighnavidhvamsine Namah।
जो राजा इक्ष्वाकु के विघ्न का नाश करने वाले हैं
- 393
इतिकर्तव्यतेप्सित
ॐ इतिकर्तव्यतेप्सिताय नमः।
Om Itikartavyatepsitaya Namah।
जो यजमान की मनोवांछा पूर्ण करने वाले हैं
- 394
ईशानमौलि
ॐ ईशानमौलये नमः।
Om Ishanamaulaye Namah।
जो देवों के देव हैं
- 395
ईशान
ॐ ईशानाय नमः।
Om Ishanaya Namah।
जो देवों में सर्वश्रेष्ठ हैं
- 396
ईशानसुत
ॐ ईशानसुताय नमः।
Om Ishanasutaya Namah।
जो भगवान शङ्कर के पुत्र हैं
- 397
ईतिहा
ॐ ईतिघ्ने नमः।
Om Itighne Namah।
जो फसल की समस्त प्रकार के रोगों एवं विपदाओं से रक्षा करने वाले हैं
- 398
ईषणात्रयकल्पान्त
ॐ ईषणात्रयकल्पान्ताय नमः।
Om Ishanatrayakalpantaya Namah।
जो भौतिक कामनाओं के प्रति वैराग्य उत्पन्न करने वाले हैं
- 399
ईहामात्रविवर्जित
ॐ ईहामात्रविवर्जिताय नमः।
Om Ihamatravivarjitaya Namah।
जो समस्त इच्छाओं से रहित हैं
- 400
उपेन्द्र
ॐ उपेन्द्राय नमः।
Om Upendraya Namah।
जो कश्यप-अदिति के यहाँ बालक के रूप में अवतरित होने वाले हैं
- 401
उडुभृन्मौलि
ॐ उडुभृन्मौलये नमः।
Om Udubhrinmaulaye Namah।
जो अपने मस्तक पर चन्द्रमा धारण करने वाले हैं
- 402
उण्डेरकबलिप्रिय
ॐ उण्डेरकबलिप्रियाय नमः।
Om Underakabalipriyaya Namah।
जिन्हें गोल-गोल मिष्टान्न प्रिय हैं
- 403
उन्नतानन
ॐ उन्नताननाय नमः।
Om Unnatananaya Namah।
जो ब्रह्मा आदि उत्कृष्ट देवों में चेतना जगाने वाले हैं
- 404
उत्तुङ्ग
ॐ उत्तुङ्गाय नमः।
Om Uttungaya Namah।
जो अत्यन्त विशाल देह वाले हैं
- 405
उदारत्रिदशाग्रणी
ॐ उदारत्रिदशाग्रण्ये नमः।
Om Udaratridashagranye Namah।
जो उदार देवताओं में सर्वश्रेष्ठ हैं
- 406
ऊर्जस्वान्
ॐ ऊर्जस्वते नमः।
Om Urjasvate Namah।
जो असीमित ऊर्जा वाले हैं
- 407
ऊष्मलमद
ॐ ऊष्मलमदाय नमः।
Om Ushmalamadaya Namah।
जिनकी देह से गरम मद प्रवाहित होता है
- 408
ऊहापोहदुरासद
ॐ ऊहापोहदुरासदाय नमः।
Om Uhapohadurasadaya Namah।
जो समस्त तर्क-वितर्क से परे हैं
- 409
ऋग्यजुस्सामसम्भूति
ॐ ऋग्यजुस्सामसम्भूतये नमः।
Om Rigyajussamasambhutaye Namah।
जो ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद को प्रकट करने वाले हैं
- 410
ऋद्धिसिद्धिप्रवर्तक
ॐ ऋद्धिसिद्धिप्रवर्तकाय नमः।
Om Riddhisiddhipravartakaya Namah।
जो राज्य-सम्पत्ति तथा अणिमा आदि सिद्धियों को प्रदान करने वाले हैं
- 411
ऋजुचित्तैकसुलभ
ॐ ऋजुचित्तैकसुलभाय नमः।
Om Rijuchittaikasulabhaya Namah।
जो सद्गुणी भक्तों को सरलता से प्राप्त होने वाले हैं
- 412
ऋणत्रयविमोचक
ॐ ऋणत्रयविमोचकाय नमः।
Om Rinatrayavimochakaya Namah।
जो देव ऋण, ऋषि ऋण तथा पितृ ऋण से मुक्त करने वाले हैं
- 413
स्वभक्त लुप्तविघ्न
ॐ स्वभक्तानां लुप्तविघ्नाय नमः।
Om Svabhaktanam Luptavighnaya Namah।
जो अपने भक्तों के समस्त कष्टों का नाश करने वाले हैं
- 414
सुरद्विषांलुप्तशक्ति
ॐ सुरद्विषां-लुप्तशक्तये नमः।
Om Suradvisham-luptashaktaye Namah।
जो दैत्यों की शक्ति नष्ट करने वाले हैं
- 415
विमुखार्चन लुप्तश्री
ॐ विमुखार्चानां लुप्तश्रिये नमः।
Om Vimukharchanam Luptashriye Namah।
जो अधर्मियों की समृद्धि नष्ट करने वाले हैं
- 416
लूताविस्फोटनाशन
ॐ लूताविस्फोटनाशनाय नमः।
Om Lutavisphotanashanaya Namah।
जो विभिन्न रोगों का नाश करने वाले हैं
- 417
एकारपीठमध्यस्थ
ॐ एकारपीठमध्यस्थाय नमः।
Om Ekarapithamadhyasthaya Namah।
जो त्रिकोणचक्र के मध्य में विराजमान हैं
- 418
एकपादकृतासन
ॐ एकपादकृतासनाय नमः।
Om Ekapadakritasanaya Namah।
जो एक पैर पर खड़े रहने वाले हैं
- 419
एजिताखिलदैत्यश्री
ॐ एजिताखिलदैत्यश्रिये नमः।
Om Ejitakhiladaityashriye Namah।
जो दैत्यों की समृद्धि नष्ट करने वाले हैं
- 420
एधिताखिलसंश्रय
ॐ एधिताखिलसंश्रयाय नमः।
Om Edhitakhilasamshrayaya Namah।
जो भक्तों के वैभव में वृद्धि करने वाले हैं
- 421
ऐश्वर्यनिधि
ॐ ऐश्वर्यनिधये नमः।
Om Aishvaryanidhaye Namah।
जो समस्त ऐश्वर्य के स्वामी हैं
- 422
ऐश्वर्य
ॐ ऐश्वर्याय नमः।
Om Aishvaryaya Namah।
जो स्वयं ऐश्वर्य स्वरूप हैं
- 423
ऐहिकामुष्मिकप्रद
ॐ ऐहिकामुष्मिकप्रदाय नमः।
Om Aihikamushmikapradaya Namah।
जो लौकिक और पारलौकिक सुख देने वाले हैं
- 424
ऐरम्मदसमोन्मेष
ॐ ऐरम्मदसमोन्मेषाय नमः।
Om Airammadasamonmeshaya Namah।
जो विद्युत के समान तेज वाले हैं
- 425
ऐरावतनिभानन
ॐ ऐरावतनिभाननाय नमः।
Om Airavatanibhananaya Namah।
जिनका मुख ऐरावत हाथी के समान है
- 426
ओङ्कारवाच्य
ॐ ओङ्कारवाच्याय नमः।
Om Onkaravachyaya Namah।
जो 'ॐ' मन्त्र के सार हैं
- 427
ओङ्कार
ॐ ओङ्काराय नमः।
Om Onkaraya Namah।
जो स्वयं ॐ स्वरूप हैं
- 428
ओजस्वान्
ॐ ओजस्वते नमः।
Om Ojasvate Namah।
जो अतुलनीय तेज वाले हैं
- 429
ओषधीपति
ॐ ओषधीपतये नमः।
Om Oshadhipataye Namah।
जो औषधियों के अधिपति चन्द्रमा स्वरूप हैं
- 430
औदार्यनिधि
ॐ औदार्यनिधये नमः।
Om Audaryanidhaye Namah।
जो भक्तों के प्रति अत्यन्त उदार हैं
- 431
औद्धत्यधुर्य
ॐ औद्धत्यधुर्याय नमः।
Om Auddhatyadhuryaya Namah।
जो अपने भक्तों पर कृपा हेतु अत्यन्त उतकर्षित होते हैं
- 432
औन्नत्यनिस्स्वन
ॐ औन्नत्यनिस्स्वनाय नमः।
Om Aunnatyanissvanaya Namah।
जो सबकी अपेक्षा उच्चस्वर से गर्जना करने वाले हैं
- 433
सुरनागानामङ्कुश
ॐ सुरनागानामङ्कुशाय नमः।
Om Suranaganamankushaya Namah।
जो तीनों लोकों को नियन्त्रित करने वाले हैं
- 434
सुरविद्विषामङ्कुश
ॐ सुरविद्विषामङ्कुशाय नमः।
Om Suravidvishamankushaya Namah।
जो देवताओं और विद्वानों के द्वेषियों को दण्डित करने वाले हैं
- 435
अःसमस्तविसर्गान्तपदेषुपरिकीर्तित
ॐ अःसमस्तविसर्गान्तपदेषुपरिकीर्तिताय नमः।
Om Ahsamastavisargantapadeshuparikirtitaya Namah।
सम्पूर्ण वर्णमाला जिनकी स्तुति करती है
- 436
कमण्डलुधर
ॐ कमण्डलुधराय नमः।
Om Kamandaludharaya Namah।
जो कमण्डलु धारण करने वाले हैं
- 437
कल्प
ॐ कल्पाय नमः।
Om Kalpaya Namah।
जो स्वयं प्रलयस्वरूप हैं
- 438
कपर्दी
ॐ कपर्दिने नमः।
Om Kapardine Namah।
जो जटाजूट धारण करने वाले हैं
- 439
कलभानन
ॐ कलभाननाय नमः।
Om Kalabhananaya Namah।
जो गजमुख अथवा हाथी के समान मुख वाले हैं
- 440
कर्मसाक्षी
ॐ कर्मसाक्षिणे नमः।
Om Karmasakshine Namah।
जो अदृष्ट कर्मों के भी साक्षी हैं
- 441
कर्मकर्ता
ॐ कर्मकर्त्रे नमः।
Om Karmakartre Namah।
जो कर्म करने की प्रेरणा देने वाले हैं
- 442
कर्माकर्मफलप्रद
ॐ कर्माकर्मफलप्रदाय नमः।
Om Karmakarmaphalapradaya Namah।
जो कर्मानुसार स्वर्ग और मोक्षरूप फल देने वाले हैं
- 443
कदम्बगोलकाकार
ॐ कदम्बगोलकाकाराय नमः।
Om Kadambagolakakaraya Namah।
जो कदम्ब-पुष्प के समान गोल आकार वाले हैं
- 444
कूष्माण्डगणनायक
ॐ कूष्माण्डगणनायकाय नमः।
Om Kushmandagananayakaya Namah।
जो दुष्ट ग्रहों पर कठोर शासन करने वाले हैं
- 445
कारुण्यदेह
ॐ कारुण्यदेहाय नमः।
Om Karunyadehaya Namah।
जो करुणा के सागर हैं
- 446
कपिल
ॐ कपिलाय नमः।
Om Kapilaya Namah।
जो कपिल मुनि स्वरूप हैं
- 447
कथक
ॐ कथकाय नमः।
Om Kathakaya Namah।
जो सम्प्रदायों के प्रवर्तक हैं
- 448
कटिसूत्रभृत्
ॐ कटिसूत्रभृते नमः।
Om Katisutrabhrite Namah।
जो स्वर्ण का कमरबन्ध धारण करने वाले हैं
- 449
खर्व
ॐ खर्वाय नमः।
Om Kharvaya Namah।
जो वामन स्वरूप हैं
- 450
खड्गप्रिय
ॐ खड्गप्रियाय नमः।
Om Khadgapriyaya Namah।
जिन्हें खड्ग अत्यन्त प्रिय है
- 451
खड्गखान्तान्तःस्थ
ॐ खड्गखान्तान्तःस्थाय नमः।
Om Khadgakhantantahsthaya Namah।
जो गकार में विराजमान हैं
- 452
खनिर्मल
ॐ खनिर्मलाय नमः।
Om Khanirmalaya Namah।
जो आकाश की भाँति सबमें रहते हुए भी सबसे निर्लिप्त हैं
- 453
खल्वाटशृङ्गनिलय
ॐ खल्वाटशृङ्गनिलयाय नमः।
Om Khalvatashringanilayaya Namah।
जो वृक्षविहीन पर्वत के शिखर पर निवास करने वाले हैं
- 454
खट्वाङ्गी
ॐ खट्वाङ्गिने नमः।
Om Khatvangine Namah।
जो खट्वाङ्ग नामक अस्त्र धारण करने वाले हैं
- 455
खदुरासद
ॐ खदुरासदाय नमः।
Om Khadurasadaya Namah।
जो आकाश की भाँति पकड़ में न आ सकने वाले हैं
- 456
गुणाढ्य
ॐ गुणाढ्याय नमः।
Om Gunadhyaya Namah।
जो सर्वगुण सम्पन्न हैं
- 457
गहन
ॐ गहनाय नमः।
Om Gahanaya Namah।
जो अत्यन्त गूढ़ हैं
- 458
गस्थ
ॐ गस्थाय नमः।
Om Gasthaya Namah।
जो 'ग' बीजाक्षर में विराजमान हैं
- 459
गद्यपद्यसुधार्णव
ॐ गद्यपद्यसुधार्णवाय नमः।
Om Gadyapadyasudharnavaya Namah।
जो गद्य एवं पद्य में काव्यरस रूपी अमृत के सागर हैं
- 460
गद्यगानप्रिय
ॐ गद्यगानप्रियाय नमः।
Om Gadyaganapriyaya Namah।
जिन्हें सामवेद का पाठ प्रिय है
- 461
गर्ज
ॐ गर्जाय नमः।
Om Garjaya Namah।
जो बादल के समान गर्जना करने वाले हैं
- 462
गीतगीर्वाणपूर्वज
ॐ गीतगीर्वाणपूर्वजाय नमः।
Om Gitagirvanapurvajaya Namah।
जो नाद से उत्पन्न गीत तथा नाद के अर्थ से उत्पन्न देवताओं के पूर्वज हैं
- 463
गुह्याचाररत
ॐ गुह्याचाररताय नमः।
Om Guhyachararataya Namah।
जो परमात्मा के चिन्तन में लगे साधकों पर सन्तुष्ट रहने वाले हैं
- 464
गुह्य
ॐ गुह्याय नमः।
Om Guhyaya Namah।
जो एकान्त में जानने योग्य हैं
- 465
गुह्यागमनिरूपित
ॐ गुह्यागमनिरूपिताय नमः।
Om Guhyagamanirupitaya Namah।
जिनकी महिमा वेदों में वर्णित है
- 466
गुहाशय
ॐ गुहाशयाय नमः।
Om Guhashayaya Namah।
जो हृदय में शयन करने वाले अन्तर्यामी पुरुष हैं
- 467
गुहाब्धिस्थ
ॐ गुहाब्धिस्थाय नमः।
Om Guhabdhisthaya Namah।
जो हृदय रूपी आकाश सागर में स्थित रहने वाले हैं
- 468
गुरुगम्य
ॐ गुरुगम्याय नमः।
Om Gurugamyaya Namah।
जिन्हें मात्र गुरु के द्वारा ही जाना जा सकता है
- 469
गुरोर्गुरु
ॐ गुरोर्गुरवे नमः।
Om Gurorgurave Namah।
जो गुरुओं के भी गुरु हैं
- 470
घण्टाघर्घरिकामाली
ॐ घण्टाघर्घरिकामालिने नमः।
Om Ghantaghargharikamaline Namah।
जो मनोहर शब्द करने वाली घर्घरिका नामक घण्टी की माला धारण करने वाले हैं
- 471
घटकुम्भ
ॐ घटकुम्भाय नमः।
Om Ghatakumbhaya Namah।
जो विशाल मस्तक वाले हैं
- 472
घटोदर
ॐ घटोदराय नमः।
Om Ghatodaraya Namah।
जो घड़े के समान पेट वाले हैं
- 473
चण्ड
ॐ चण्डाय नमः।
Om Chandaya Namah।
जो प्रचण्ड पराक्रमी हैं
- 474
चण्डेश्वरसुहृत्
ॐ चण्डेश्वरसुहृदे नमः।
Om Chandeshvarasuhride Namah।
जो भगवान शिव के पार्षद चण्डेश्वर के प्रिय हैं
- 475
चण्डीश
ॐ चण्डीशाय नमः।
Om Chandishaya Namah।
जो भगवान शिव और माता पार्वती के प्रिय हैं
- 476
चण्डविक्रम
ॐ चण्डविक्रमाय नमः।
Om Chandavikramaya Namah।
जो क्रोधी दुष्टों पर आक्रमण करके उन्हें वश में करने वाले हैं
- 477
चराचरपति
ॐ चराचरपतये नमः।
Om Characharapataye Namah।
जो इस सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं
- 478
चिन्तामणिचर्वणलालस
ॐ चिन्तामणिचर्वणलालसाय नमः।
Om Chintamanicharvanalalasaya Namah।
जो चिन्तामणि का अभिमान नष्ट करने वाले हैं
- 479
छन्द
ॐ छन्दसे नमः।
Om Chhandase Namah।
जो स्वयं वेद के रूप में हैं
- 480
छन्दोवपु
ॐ छन्दोवपुषे नमः।
Om Chhandovapushe Namah।
जो वेदों को अपनी देह के रूप में धारण करने वाले हैं
- 481
छन्दोदुर्लक्ष्य
ॐ छन्दोदुर्लक्ष्याय नमः।
Om Chhandodurlakshyaya Namah।
वेद भी जिनको पूर्ण रूप से जानने में असमर्थ हैं
- 482
छन्दविग्रह
ॐ छन्दविग्रहाय नमः।
Om Chhandavigrahaya Namah।
जो भक्तों की इच्छा के अनुसार अवतार-शरीर धारण करने वाले हैं
- 483
जगद्योनि
ॐ जगद्योनये नमः।
Om Jagadyonaye Namah।
जो इस सृष्टि के कारण हैं
- 484
जगत्साक्षी
ॐ जगत्साक्षिणे नमः।
Om Jagatsakshine Namah।
जो इस सम्पूर्ण सृष्टि के साक्षी हैं
- 485
जगदीश
ॐ जगदीशाय नमः।
Om Jagadishaya Namah।
जो इस सम्पूर्ण सृष्टि के स्वामी हैं
- 486
जगन्मय
ॐ जगन्मयाय नमः।
Om Jaganmayaya Namah।
जो स्वयं ही जगत के रूप में विद्यमान हैं
- 487
जप
ॐ जपाय नमः।
Om Japaya Namah।
जो मन्त्र के रूप में विद्यमान हैं
- 488
जपपर
ॐ जपपराय नमः।
Om Japaparaya Namah।
जो सदैव ध्यान/जप में लीन रहने वाले हैं
- 489
जप्य
ॐ जप्याय नमः।
Om Japyaya Namah।
जो जपनीय मन्त्र के स्वरूप हैं
- 490
जिह्वासिंहासनप्रभु
ॐ जिह्वासिंहासन-प्रभवे नमः।
Om Jihvasimhasana-prabhave Namah।
जो वाणी अथवा वाक् शक्ति के स्वामी हैं
- 491
झलज्झलोल्लसद्दानझङ्कारिभ्रमराकुल
ॐ झलज्झलोल्लसद्दानझङ्कारिभ्रमराकुलाय नमः।
Om Jhalajjhalollasaddanajhankaribhramarakulaya Namah।
जो भ्रमर द्वारा आकर्षित होने वाले हैं
- 492
टङ्कारस्फारसंराव
ॐ टङ्कारस्फारसंरावाय नमः।
Om Tankaraspharasamravaya Namah।
जिनके आभूषण टँकार जैसी ध्वनि करने वाले हैं
- 493
टङ्कारिमणिनूपुर
ॐ टङ्कारिमणिनूपुराय नमः।
Om Tankarimaninupuraya Namah।
जो छोटे-छोटे नूपरों से सुसज्जित पायल धारण करने वाले हैं
- 494
ठद्वयीपल्लवान्तःस्थसर्वमन्त्रैकसिद्धिद
ॐ ठद्वयीपल्लवान्तःस्थसर्वमन्त्रैकसिद्धिदाय नमः।
Om Thadvayipallavantahsthasarvamantraikasiddhidaya Namah।
जो विधिवत पढे गये मन्त्रों के एकमात्र सिद्धिदाता हैं
- 495
डिण्डिमुण्ड
ॐ डिण्डिमुण्डाय नमः।
Om Dindimundaya Namah।
जो ढ़ोल के समान विशाल मस्तक वाले हैं
- 496
डाकिनीश
ॐ डाकिनीशाय नमः।
Om Dakinishaya Namah।
जो योगिनियों के स्वामी हैं
- 497
डामर
ॐ डामराय नमः।
Om Damaraya Namah।
जो डामर नामक तन्त्र के समान हैं
- 498
डिण्डिमप्रिय
ॐ डिण्डिमप्रियाय नमः।
Om Dindimapriyaya Namah।
जो नगाड़े की ध्वनि से प्रसन्न होने वाले हैं
- 499
ढक्कानिनादमुदित
ॐ ढक्कानिनादमुदिताय नमः।
Om Dhakkaninadamuditaya Namah।
जिन्हें ढक्के की ध्वनि अत्यन्त प्रिय है
- 500
ढौक
ॐ ढौकाय नमः।
Om Dhaukaya Namah।
जो सब कुछ जानने वाले हैं
- 501
ढुण्ढिविनायक
ॐ ढुण्ढिविनायकाय नमः।
Om Dhundhivinayakaya Namah।
जो विघ्न-बाधाओं को दूर करने वाले हैं
- 502
तत्त्व परम तत्त्व
ॐ तत्त्वानां परमाय तत्त्वाय नमः।
Om Tattvanam Paramaya Tattvaya Namah।
जो समस्त सिद्धान्तों में सर्वोच्च सिद्धान्त हैं
- 503
तत्त्वम्पदनिरूपित
ॐ तत्त्वम्पदनिरूपिताय नमः।
Om Tattvampadanirupitaya Namah।
जो भक्तों को सैद्धान्तिक मार्ग पर चलाने वाले हैं
- 504
तारकान्तरसंस्थान
ॐ तारकान्तरसंस्थानाय नमः।
Om Tarakantarasamsthanaya Namah।
जो नेत्रों की पुतलियों में वास करने वाले हैं
- 505
तारक
ॐ तारकाय नमः।
Om Tarakaya Namah।
जो भवसागर से तारने वाले हैं
- 506
तारकान्तक
ॐ तारकान्तकाय नमः।
Om Tarakantakaya Namah।
जो तारकासुर का संहार करने वाले हैं
- 507
स्थाणु
ॐ स्थाणवे नमः।
Om Sthanave Namah।
जो स्थिर हैं
- 508
स्थाणुप्रिय
ॐ स्थाणुप्रियाय नमः।
Om Sthanupriyaya Namah।
जो भगवान शिव के प्रिय पुत्र हैं
- 509
स्थाता
ॐ स्थात्रे नमः।
Om Sthatre Namah।
जो युद्ध में दृढ़तापूर्वक डटे रहने वाले हैं
- 510
स्थावर जङ्गम जगत्
ॐ स्थावराय जङ्गमाय जगते नमः।
Om Sthavaraya Jangamaya Jagate Namah।
जो स्वयं चराचर जगत स्वरूप हैं
- 511
दक्षयज्ञप्रमथन
ॐ दक्षयज्ञप्रमथनाय नमः।
Om Dakshayajnapramathanaya Namah।
जो दक्ष प्रजापति के यज्ञ का विध्वंस करने वाले हैं
- 512
दाता
ॐ दात्रे नमः।
Om Datre Namah।
जो पतितपावन हैं
- 513
दानवमोहन
ॐ दानवमोहनाय नमः।
Om Danavamohanaya Namah।
जो राक्षसों को विकेकहीन करने वाले हैं
- 514
दयावान्
ॐ दयावते नमः।
Om Dayavate Namah।
जो अत्यन्त दयावान हैं
- 515
दिव्यविभव
ॐ दिव्यविभवाय नमः।
Om Divyavibhavaya Namah।
जो भक्तों को दिव्य वैभव से सम्पन्न करने वाले हैं
- 516
दण्डभृत्
ॐ दण्डभृते नमः।
Om Dandabhrite Namah।
जो दण्डनीति का पालन करने वाले हैं
- 517
दण्डनायक
ॐ दण्डनायकाय नमः।
Om Dandanayakaya Namah।
जो दण्ड के प्रवर्तक हैं
- 518
दन्तप्रभिन्नाभ्रमाल
ॐ दन्तप्रभिन्नाभ्रमालाय नमः।
Om Dantaprabhinnabhramalaya Namah।
जो अपने दाँत के आघात से मेघों को छिन्न-भिन्न कर देने वाले हैं
- 519
दैत्यवारणदारण
ॐ दैत्यवारणदारणाय नमः।
Om Daityavaranadaranaya Namah।
जो दानवों को रोकने और उनका अन्त करने वाले हैं
- 520
दंष्ट्रालग्नद्विपघट
ॐ दंष्ट्रालग्नद्विपघटाय नमः।
Om Damshtralagnadvipaghataya Namah।
जिनके दाढ़ में शत्रुओं के हाथियों का समूह स्थित है
- 521
देवार्थनृगजाकृति
ॐ देवार्थनृगजाकृतये नमः।
Om Devarthanrigajakritaye Namah।
जो देवताओं के कल्याण हेतु मनुष्य और गज की आकृति धारण करने वाले हैं
- 522
धनधान्यपति
ॐ धनधान्यपतये नमः।
Om Dhanadhanyapataye Namah।
जो धन-धान्य के अधिपति हैं
- 523
धन्य
ॐ धन्याय नमः।
Om Dhanyaya Namah।
जो धन सम्पन्न एवं पुण्यवान हैं
- 524
धनद
ॐ धनदाय नमः।
Om Dhanadaya Namah।
जो धन-सम्पत्ति प्रदान करने वाले हैं
- 525
धरणीधर
ॐ धरणीधराय नमः।
Om Dharanidharaya Namah।
जो पृथ्वी को धारण करने वाले हैं
- 526
ध्यानैकप्रकट
ॐ ध्यानैकप्रकटाय नमः।
Om Dhyanaikaprakataya Namah।
जो एकमात्र ध्यान में ही प्रकट होने वाले हैं
- 527
ध्येय
ॐ ध्येयाय नमः।
Om Dhyeyaya Namah।
जो ध्यान से प्राप्त होने वाले हैं
- 528
ध्यान
ॐ ध्यानाय नमः।
Om Dhyanaya Namah।
जो स्वयं ध्यानस्वरूप हैं
- 529
ध्यानपरायण
ॐ ध्यानपरायणाय नमः।
Om Dhyanaparayanaya Namah।
जो ध्यान में संलग्न रहने वाले हैं
- 530
नन्द्य
ॐ नन्द्याय नमः।
Om Nandyaya Namah।
जो सदैव उत्साहित एवं आनन्दित रहने वाले हैं
- 531
नन्दिप्रिय
ॐ नन्दिप्रियाय नमः।
Om Nandipriyaya Namah।
जो नन्दिकेश्वर के अत्यन्त प्रिय हैं
- 532
नाद
ॐ नादाय नमः।
Om Nadaya Namah।
जो स्वयं नाद स्वरूप हैं
- 533
नादमध्यप्रतिष्ठित
ॐ नादमध्यप्रतिष्ठिताय नमः।
Om Nadamadhyapratishthitaya Namah।
जो सङ्गीत एवं वाद्ययन्त्रों के मध्य प्रसन्न रहने वाले हैं
- 534
निष्कल
ॐ निष्कलाय नमः।
Om Nishkalaya Namah।
जो अवयव रहित हैं
- 535
निर्मल
ॐ निर्मलाय नमः।
Om Nirmalaya Namah।
जो पूर्णतः पवित्र हैं
- 536
नित्य
ॐ नित्याय नमः।
Om Nityaya Namah।
जो अनश्वर हैं
- 537
नित्यानित्य
ॐ नित्यानित्याय नमः।
Om Nityanityaya Namah।
जो नश्वर-अनश्वर दोनों रूपों को धारण करने वाले हैं
- 538
निरामय
ॐ निरामयाय नमः।
Om Niramayaya Namah।
जो अविद्या रूपी महारोग से मुक्त हैं
- 539
परं व्योम
ॐ परस्मै व्योम्ने नमः।
Om Parasmai Vyomne Namah।
जो नित्य धामस्वरूप हैं
- 540
परं धाम
ॐ परस्मै धाम्ने नमः।
Om Parasmai Dhamne Namah।
जो परम ज्योति हैं
- 541
परमात्मा
ॐ परमात्मने नमः।
Om Paramatmane Namah।
जो स्वयं परब्रह्म हैं
- 542
परं पद
ॐ परस्मै पदाय नमः।
Om Parasmai Padaya Namah।
जो सर्वोच्च पद पर प्रतिष्ठित हैं
- 543
परात्पर
ॐ परात्पराय नमः।
Om Paratparaya Namah।
जो पर अर्थात् भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश से भी उत्कृष्ट हैं
- 544
पशुपति
ॐ पशुपतये नमः।
Om Pashupataye Namah।
जो समस्त प्राणियों के पालक हैं
- 545
पशुपाशविमोचक
ॐ पशुपाशविमोचकाय नमः।
Om Pashupashavimochakaya Namah।
जो जीवों को विभिन्न बन्धनों से मुक्त करने वाले हैं
- 546
पूर्णानन्द
ॐ पूर्णानन्दाय नमः।
Om Purnanandaya Namah।
जो आनन्द की वर्षा करने वाले हैं
- 547
परानन्द
ॐ परानन्दाय नमः।
Om Paranandaya Namah।
जो सदैव परम आनन्द प्रदान करने वाले हैं
- 548
पुराणपुरुषोत्तम
ॐ पुराणपुरुषोत्तमाय नमः।
Om Puranapurushottamaya Namah।
जो समस्त देवगणों में सर्वोच्च हैं
- 549
पद्मप्रसन्ननयन
ॐ पद्मप्रसन्ननयनाय नमः।
Om Padmaprasannanayanaya Namah।
जो खिले हुये कमलपुष्पों के समान प्रसन्न नेत्रों वाले हैं
- 550
प्रणताज्ञानमोचन
ॐ प्रणताज्ञानमोचनाय नमः।
Om Pranatajnanamochanaya Namah।
जो भक्त के समस्त अज्ञान का नाश करने वाले हैं
- 551
प्रमाणप्रत्ययातीत
ॐ प्रमाणप्रत्ययातीताय नमः।
Om Pramanapratyayatitaya Namah।
जो विभिन्न प्रमाणों की प्रतीति से परे नित्य ज्ञान स्वरूप हैं
- 552
प्रणतार्तिनिवारण
ॐ प्रणतार्तिनिवारणाय नमः।
Om Pranatartinivaranaya Namah।
जो भक्तों के कष्ट का निवारण करने वाले हैं
- 553
फलहस्त
ॐ फलहस्ताय नमः।
Om Phalahastaya Namah।
जो भक्तों को अविलम्ब फल प्रदान करने वाले हैं
- 554
फणिपति
ॐ फणिपतये नमः।
Om Phanipataye Namah।
जो शेष और वासुकि नाग के भी स्वामी हैं
- 555
फेत्कार
ॐ फेत्काराय नमः।
Om Phetkaraya Namah।
जो स्वयं तन्त्र स्वरूप हैं
- 556
फाणितप्रिय
ॐ फाणितप्रियाय नमः।
Om Phanitapriyaya Namah।
जो गन्ने के रस के प्रेमी हैं
- 557
बाणार्चिताङ्घ्रियुगल
ॐ बाणार्चिताङ्घ्रियुगलाय नमः।
Om Banarchitanghriyugalaya Namah।
जिनके चरण कमलों का पूजन बाणासुर करता है
- 558
बालकेलिकुतूहली
ॐ बालकेलिकुतूहलिने नमः।
Om Balakelikutuhaline Namah।
जो बाल क्रीडा का आनन्द लेने वाले हैं
- 559
ब्रह्म
ॐ ब्रह्मणे नमः।
Om Brahmane Namah।
जो स्वयं ब्रह्म स्वरूप हैं
- 560
ब्रह्मार्चितपद
ॐ ब्रह्मार्चितपदाय नमः।
Om Brahmarchitapadaya Namah।
जिनके चरण कमलों का पूजन ब्रह्मा जी करते हैं
- 561
ब्रह्मचारी
ॐ ब्रह्मचारिणे नमः।
Om Brahmacharine Namah।
जो ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने वाले हैं
- 562
बृहस्पति
ॐ बृहस्पतये नमः।
Om Brihaspataye Namah।
जो स्वयं देवगुरु बृहस्पति स्वरूप हैं
- 563
बृहत्तम
ॐ बृहत्तमाय नमः।
Om Brihattamaya Namah।
जो अत्यधिक विशालकाय हैं
- 564
ब्रह्मपर
ॐ ब्रह्मपराय नमः।
Om Brahmaparaya Namah।
जो ब्रह्मा जी से भी श्रेष्ठ हैं
- 565
ब्रह्मण्य
ॐ ब्रह्मण्याय नमः।
Om Brahmanyaya Namah।
जो ब्राह्मणों पर श्रद्धा रखने वाले हैं
- 566
ब्रह्मवित्प्रिय
ॐ ब्रह्मवित्प्रियाय नमः।
Om Brahmavitpriyaya Namah।
जो विद्यार्थियों को प्रिय हैं
- 567
बृहन्नादाग्र्यचीत्कार
ॐ बृहन्नादाग्र्यचीत्काराय नमः।
Om Brihannadagryachitkaraya Namah।
जो मेघों से भी अधिक उच्चस्वर से गर्जना करने वाले हैं
- 568
ब्रह्माण्डावलिमेखल
ॐ ब्रह्माण्डावलिमेखलाय नमः।
Om Brahmandavalimekhalaya Namah।
जो ब्रह्माण्ड को अपनी कटिसूत्र के रूप में धारण करने वाले हैं
- 569
भ्रूक्षेपदत्तलक्ष्मीक
ॐ भ्रूक्षेपदत्तलक्ष्मीकाय नमः।
Om Bhrukshepadattalakshmikaya Namah।
जो पलक झपकते ही भक्तों पर धनवर्षा करने वाले हैं
- 570
भर्ग
ॐ भर्गाय नमः।
Om Bhargaya Namah।
जो सूर्य के समान तेज वाले हैं
- 571
भद्र
ॐ भद्राय नमः।
Om Bhadraya Namah।
जो सर्वोत्तम एवं सभ्य हैं
- 572
भयापह
ॐ भयापहाय नमः।
Om Bhayapahaya Namah।
जो भक्तों के ज्ञात-अज्ञात भय नष्ट करने वाले हैं
- 573
भगवान्
ॐ भगवते नमः।
Om Bhagavate Namah।
जो षड्विध ऐश्वर्य से सम्पन्न हैं
- 574
भक्तिसुलभ
ॐ भक्तिसुलभाय नमः।
Om Bhaktisulabhaya Namah।
जो भक्ति द्वारा सुगमता से प्राप्त किए जा सकते हैं
- 575
भूतिद
ॐ भूतिदाय नमः।
Om Bhutidaya Namah।
जो अष्ट सिद्धियों के दाता हैं
- 576
भूतिभूषण
ॐ भूतिभूषणाय नमः।
Om Bhutibhushanaya Namah।
जो भस्म धारण करने वाले हैं
- 577
भव्य
ॐ भव्याय नमः।
Om Bhavyaya Namah।
जो कल्याणस्वरूप हैं
- 578
भूतालय
ॐ भूतालयाय नमः।
Om Bhutalayaya Namah।
जो पञ्चभूत आदि समस्त भूत प्राणियों के आश्रय हैं
- 579
भोगदाता
ॐ भोगदात्रे नमः।
Om Bhogadatre Namah।
जो जीवों को कर्मानुसार फल प्रदान करने वाले हैं
- 580
भ्रूमध्यगोचर
ॐ भ्रूमध्यगोचराय नमः।
Om Bhrumadhyagocharaya Namah।
जो ध्यान काल में दोनों भौंहों के मध्य अनुभूत होने वाले हैं
- 581
मन्त्र
ॐ मन्त्राय नमः।
Om Mantraya Namah।
जो स्वयं मन्त्र स्वरूप हैं
- 582
मन्त्रपति
ॐ मन्त्रपतये नमः।
Om Mantrapataye Namah।
जो समस्त मन्त्रणाओं के अधिपति हैं
- 583
मन्त्री
ॐ मन्त्रिणे नमः।
Om Mantrine Namah।
जो राज्य सञ्चालन हेतु समस्त मन्त्रशक्ति के अधिष्ठाता हैं
- 584
मदमत्तमनोरम
ॐ मदमत्तमनोरमाय नमः।
Om Madamattamanoramaya Namah।
जो आनन्द-उत्साह में लीन हैं
- 585
मेखलावान्
ॐ मेखलावते नमः।
Om Mekhalavate Namah।
जो कमरबन्ध धारण करने वाले हैं
- 586
मन्दगति
ॐ मन्दगतये नमः।
Om Mandagataye Namah।
जो अल्प बुद्धियों के भी आश्रय दाता हैं
- 587
मतिमत्कमलेक्षण
ॐ मतिमत्कमलेक्षणाय नमः।
Om Matimatkamalekshanaya Namah।
जो सद्बुद्धि देने वाले हैं
- 588
महाबल
ॐ महाबलाय नमः।
Om Mahabalaya Namah।
जो अत्यन्त बलशाली हैं
- 589
महावीर्य
ॐ महावीर्याय नमः।
Om Mahaviryaya Namah।
जो महापराक्रमी एवं साहसी हैं
- 590
महाप्राण
ॐ महाप्राणाय नमः।
Om Mahapranaya Namah।
जो समस्त जीवात्माओं के प्राण हैं
- 591
महामना
ॐ महामनसे नमः।
Om Mahamanase Namah।
जो श्रेष्ठ विचारों वाले हैं
- 592
यज्ञ
ॐ यज्ञाय नमः।
Om Yajnaya Namah।
जो स्वयं यज्ञस्वरूप हैं
- 593
यज्ञपति
ॐ यज्ञपतये नमः।
Om Yajnapataye Namah।
जो यज्ञों के स्वामी हैं
- 594
यज्ञगोप्ता
ॐ यज्ञगोप्त्रे नमः।
Om Yajnagoptre Namah।
जो यज्ञों के रक्षक हैं
- 595
यज्ञफलप्रद
ॐ यज्ञफलप्रदाय नमः।
Om Yajnaphalapradaya Namah।
जो यज्ञों का फल प्रदान करने वाले हैं
- 596
यशस्कर
ॐ यशस्कराय नमः।
Om Yashaskaraya Namah।
जो यश एवं प्रसिद्धि प्रदान करने वाले हैं
- 597
योगगम्य
ॐ योगगम्याय नमः।
Om Yogagamyaya Namah।
जो योग द्वारा प्राप्त होने वाले हैं
- 598
याज्ञिक
ॐ याज्ञिकाय नमः।
Om Yajnikaya Namah।
जो यज्ञकर्ता हैं
- 599
याजकप्रिय
ॐ याजकप्रियाय नमः।
Om Yajakapriyaya Namah।
जो यज्ञ कराने वालों के प्रिय हैं
- 600
रस
ॐ रसाय नमः।
Om Rasaya Namah।
जो परम आनन्दस्वरूप हैं
- 601
रसप्रिय
ॐ रसप्रियाय नमः।
Om Rasapriyaya Namah।
जो मधुर आदि रसों में अधिक प्रीति रखने वाले हैं
- 602
रस्य
ॐ रस्याय नमः।
Om Rasyaya Namah।
जो आस्वाद के विषय हैं
- 603
रञ्जक
ॐ रञ्जकाय नमः।
Om Ranjakaya Namah।
जो हर्ष एवं आनन्द प्रदान करने वाले हैं
- 604
रावणार्चित
ॐ रावणार्चिताय नमः।
Om Ravanarchitaya Namah।
जो रावण द्वारा पूजे जाने वाले हैं
- 605
रक्षोरक्षाकर
ॐ रक्षोरक्षाकराय नमः।
Om Rakshorakshakaraya Namah।
जो राक्षसों की जलाकर राख कर देने वाले हैं
- 606
रत्नगर्भ
ॐ रत्नगर्भाय नमः।
Om Ratnagarbhaya Namah।
जो पृथ्वी के आश्रय हैं
- 607
राजसुखप्रद
ॐ राजसुखप्रदाय नमः।
Om Rajasukhapradaya Namah।
जो राजसुख प्रदान करने वाले हैं
- 608
लक्ष्य
ॐ लक्ष्याय नमः।
Om Lakshyaya Namah।
जो समस्त प्राणियों के उद्देश्य हैं
- 609
लक्ष्यप्रद
ॐ लक्ष्यप्रदाय नमः।
Om Lakshyapradaya Namah।
जो सफलतापूर्वक लक्ष्य प्रदान करने वाले हैं
- 610
लक्ष्य
ॐ लक्ष्याय नमः।
Om Lakshyaya Namah।
जो स्वयं परम लक्ष्य हैं
- 611
लयस्थ
ॐ लयस्थाय नमः।
Om Layasthaya Namah।
जो प्रलय काल में भी विद्यमान रहने वाले हैं
- 612
लड्डुकप्रिय
ॐ लड्डुकप्रियाय नमः।
Om Laddukapriyaya Namah।
जो लड्डूओं से अत्यन्त प्रसन्न रहने वाले हैं
- 613
लानप्रिय
ॐ लानप्रियाय नमः।
Om Lanapriyaya Namah।
जो गजशाला में प्रीति रखने वाले हैं
- 614
लास्यपर
ॐ लास्यपराय नमः।
Om Lasyaparaya Namah।
जो विलास योग्य परम धाम वाले हैं
- 615
लाभकृल्लोकविश्रुत
ॐ लाभकृल्लोकविश्रुताय नमः।
Om Labhakrillokavishrutaya Namah।
जो भक्तों को शीघ्र वर प्रदान करने वाले हैं
- 616
वरेण्य
ॐ वरेण्याय नमः।
Om Varenyaya Namah।
जो गणपति भक्त राजा वरेण्य के समान हैं
- 617
वह्निवदन
ॐ वह्निवदनाय नमः।
Om Vahnivadanaya Namah।
जो अग्नि के समान तेज धारण करने वाले हैं
- 618
वन्द्य
ॐ वन्द्याय नमः।
Om Vandyaya Namah।
जो हम सभी के आराध्य हैं
- 619
वेदान्तगोचर
ॐ वेदान्तगोचराय नमः।
Om Vedantagocharaya Namah।
जो उपनिषदों के द्वारा जानने योग्य हैं
- 620
विकर्ता
ॐ विकर्त्रे नमः।
Om Vikartre Namah।
जो जन्म आदि छः भावविकारों के प्रवर्तक हैं
- 621
विश्वतश्चक्षु
ॐ विश्वतश्चक्षुषे नमः।
Om Vishvatashchakshushe Namah।
जो संसार को अपने नेत्रों के रूप में धारण करने वाले हैं
- 622
विधाता
ॐ विधात्रे नमः।
Om Vidhatre Namah।
जो सृष्टि की उत्पत्ति करने वाले हैं
- 623
विश्वतोमुख
ॐ विश्वतोमुखाय नमः।
Om Vishvatomukhaya Namah।
जो स्वयं ब्रह्मा स्वरूप में विराजमान हैं
- 624
वामदेव
ॐ वामदेवाय नमः।
Om Vamadevaya Namah।
जो स्वयं शिव स्वरूप हैं
- 625
विश्वनेता
ॐ विश्वनेत्रे नमः।
Om Vishvanetre Namah।
जो सम्पूर्ण विश्व का नेतृत्व करने वाले हैं
- 626
वज्रिवज्रनिवारण
ॐ वज्रिवज्रनिवारणाय नमः।
Om Vajrivajranivaranaya Namah।
जो इन्द्र के वज्र को स्तम्भित करने वाले हैं
- 627
विश्वबन्धनविष्कम्भाधार
ॐ विश्वबन्धनविष्कम्भाधाराय नमः।
Om Vishvabandhanavishkambhadharaya Namah।
जो सम्पूर्ण जगत की सृष्टि के आधार के आधार हैं
- 628
विश्वेश्वरप्रभु
ॐ विश्वेश्वरप्रभवे नमः।
Om Vishveshvaraprabhave Namah।
जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड और उनके स्वामियों के स्वामी हैं
- 629
शब्दब्रह्म
ॐ शब्दब्रह्मणे नमः।
Om Shabdabrahmane Namah।
जो परा नामक वाणी से अतीत नादरूपधारी हैं
- 630
शमप्राप्य
ॐ शमप्राप्याय नमः।
Om Shamaprapyaya Namah।
जो मन के निग्रह द्वारा प्राप्त किये जा सकते हैं
- 631
शम्भुशक्तिगणेश्वर
ॐ शम्भुशक्तिगणेश्वराय नमः।
Om Shambhushaktiganeshvaraya Namah।
जो शिव एवं शक्ति के गणों के स्वामी हैं
- 632
शास्ता
ॐ शास्त्रे नमः।
Om Shastre Namah।
जो शास्ता नामक देवता के स्वरूप हैं
- 633
शिखाग्रनिलय
ॐ शिखाग्रनिलयाय नमः।
Om Shikhagranilayaya Namah।
जो शिखा के अग्रभाग में वास करने वाले हैं
- 634
शरण्य
ॐ शरण्याय नमः।
Om Sharanyaya Namah।
जो हम सभी के रक्षक हैं
- 635
शिखरीश्वर
ॐ शिखरीश्वराय नमः।
Om Shikharishvaraya Namah।
जो हिमालय के समान हैं
- 636
षड्ऋतुकुसुमस्रग्वी
ॐ षड्ऋतुकुसुमस्रग्विणे नमः।
Om Shadritukusumasragvine Namah।
जो छहों ऋतुओं में खिलने वाले पुष्पों की मालाओं से सुशोभित हैं
- 637
षडाधार
ॐ षडाधाराय नमः।
Om Shadadharaya Namah।
जो छहों चक्रों के आधारभूत मूलाधार चक्र के समान हैं
- 638
षडक्षर
ॐ षडक्षराय नमः।
Om Shadaksharaya Namah।
जो छः अक्षरों वाले 'गणेशाय नमः' मन्त्र स्वरूप हैं
- 639
संसारवैद्य
ॐ संसारवैद्याय नमः।
Om Samsaravaidyaya Namah।
जो समस्त सृष्टि के चिकित्सक हैं
- 640
सर्वज्ञ
ॐ सर्वज्ञाय नमः।
Om Sarvajnaya Namah।
जो सब कुछ जानने वाले हैं
- 641
सर्वभेषजभेषज
ॐ सर्वभेषजभेषजाय नमः।
Om Sarvabheshajabheshajaya Namah।
जो समस्त औषधियों की औषधि हैं
- 642
सृष्टिस्थितिलयक्रीड
ॐ सृष्टिस्थितिलयक्रीडाय नमः।
Om Srishtisthitilayakridaya Namah।
जगत की सृष्टि, पालन तथा उसका संहार करना जिनकी लीलायें हैं
- 643
सुरकुञ्जरभेदन
ॐ सुरकुञ्जरभेदनाय नमः।
Om Surakunjarabhedanaya Namah।
जो दानवों से पूजित होकर देवताओं में भेद उत्पन्न करने वाले हैं
- 644
सिन्दूरितमहाकुम्भ
ॐ सिन्दूरितमहाकुम्भाय नमः।
Om Sinduritamahakumbhaya Namah।
जो विशाल मस्तक पर सिन्दूर धारण करने वाले हैं
- 645
सदसद्व्यक्तिदायक
ॐ सदसद्व्यक्तिदायकाय नमः।
Om Sadasadvyaktidayakaya Namah।
जो भक्तों को सद्बुद्धि प्रदान करने वाले हैं
- 646
साक्षी
ॐ साक्षिणे नमः।
Om Sakshine Namah।
जो सृष्टि की समस्त गतिविधियों के साक्षी हैं
- 647
समुद्रमथन
ॐ समुद्रमथनाय नमः।
Om Samudramathanaya Namah।
जो समुद्र मन्थन काल में देवताओं द्वारा सर्वप्रथम पूजित हैं
- 648
स्वसंवेद्य
ॐ स्वसंवेद्याय नमः।
Om Svasamvedyaya Namah।
जो स्वयं परम ज्योति स्वरूप हैं
- 649
स्वदक्षिण
ॐ स्वदक्षिणाय नमः।
Om Svadakshinaya Namah।
जो स्वयं सब कुछ करने में समर्थ हैं
- 650
स्वतन्त्र
ॐ स्वतन्त्राय नमः।
Om Svatantraya Namah।
जो स्वतन्त्र हैं
- 651
सत्यसङ्कल्प
ॐ सत्यसङ्कल्पाय नमः।
Om Satyasankalpaya Namah।
जो परम सत्य स्वरूप हैं
- 652
सामगानरत
ॐ सामगानरताय नमः।
Om Samaganarataya Namah।
जो सामगान में तल्लीन रहने वाले हैं
- 653
सुखी
ॐ सुखिने नमः।
Om Sukhine Namah।
जो परम सुखी हैं
- 654
हंस
ॐ हंसाय नमः।
Om Hamsaya Namah।
जो सूर्य के समान हैं
- 655
हस्तिपिशाचीश
ॐ हस्तिपिशाचीशाय नमः।
Om Hastipishachishaya Namah।
जो हस्तिपिशाचीश नामक नवाक्षर मन्त्र के देवता हैं
- 656
हवन
ॐ हवनाय नमः।
Om Havanaya Namah।
जो आहुतिस्वरूप हैं
- 657
हव्यकव्यभुक्
ॐ हव्यकव्यभुजे नमः।
Om Havyakavyabhuje Namah।
जो देवताओं और पितरों को दी जाने वाली आहुति ग्रहण करने वाले हैं
- 658
हव्य
ॐ हव्याय नमः।
Om Havyaya Namah।
जो हव्य अर्थात् यज्ञ की आहुति के समान हैं
- 659
हुतप्रिय
ॐ हुतप्रियाय नमः।
Om Hutapriyaya Namah।
जो यज्ञाहुति में दिये गये द्रव्य के प्रेमी हैं
- 660
हर्ष
ॐ हर्षाय नमः।
Om Harshaya Namah।
जो सदैव प्रसन्नचित्त रहने वाले हैं
- 661
हृल्लेखामन्त्रमध्यग
ॐ हृल्लेखामन्त्रमध्यगाय नमः।
Om Hrillekhamantramadhyagaya Namah।
जो हृल्लेखा बीज मन्त्र के अर्थात् ह्रीं के मध्य वास करने वाले हैं
- 662
क्षेत्राधिप
ॐ क्षेत्राधिपाय नमः।
Om Kshetradhipaya Namah।
जो प्रयाग आदि तीर्थक्षेत्रों के अथवा शरीर आदि के स्वामी हैं
- 663
क्षमाभर्ता
ॐ क्षमाभर्त्रे नमः।
Om Kshamabhartre Namah।
जो पृथ्वी के आधार हैं
- 664
क्षमापरपरायण
ॐ क्षमापरपरायणाय नमः।
Om Kshamaparaparayanaya Namah।
जो क्षमाशील मुनियों द्वारा प्राप्य हैं
- 665
क्षिप्रक्षेमकर
ॐ क्षिप्रक्षेमकराय नमः।
Om Kshiprakshemakaraya Namah।
जो तत्क्षण कल्याण करने वाले हैं
- 666
क्षेमानन्द
ॐ क्षेमानन्दाय नमः।
Om Kshemanandaya Namah।
जो मंगलकर एवं आनन्द स्वरूप हैं
- 667
क्षोणीसुरद्रुम
ॐ क्षोणीसुरद्रुमाय नमः।
Om Kshonisuradrumaya Namah।
जो पृथ्वी पर कल्पवृक्ष के समान समस्त मनोरथों को पूर्ण करने वाले हैं
- 668
धर्मप्रद
ॐ धर्मप्रदाय नमः।
Om Dharmapradaya Namah।
जो धर्म प्रदान करने वाले हैं
- 669
अर्थद
ॐ अर्थदाय नमः।
Om Arthadaya Namah।
जो धन-सम्पदा प्रदान करने वाले हैं
- 670
कामदाता
ॐ कामदात्रे नमः।
Om Kamadatre Namah।
जो समस्त इच्छाओं की पूर्ति करने वाले हैं
- 671
सौभाग्यवर्धन
ॐ सौभाग्यवर्धनाय नमः।
Om Saubhagyavardhanaya Namah।
जो स्त्रियों को सौभाग्य वृद्धि का वर देने वाले हैं
- 672
विद्याप्रद
ॐ विद्याप्रदाय नमः।
Om Vidyapradaya Namah।
जो विद्या प्रदान करने वाले हैं
- 673
विभवद
ॐ विभवदाय नमः।
Om Vibhavadaya Namah।
जो सम्पत्ति प्रदान करने वाले हैं
- 674
भुक्तिमुक्तिफलप्रद
ॐ भुक्तिमुक्तिफलप्रदाय नमः।
Om Bhuktimuktiphalapradaya Namah।
जो सांसारिक सुख एवं मोक्ष प्रदान करने वाले हैं
- 675
आभिरूप्यकर
ॐ आभिरूप्यकराय नमः।
Om Abhirupyakaraya Namah।
जो विद्वत्ता और सुन्दरता प्रदान करने वाले हैं
- 676
वीरश्रीप्रद
ॐ वीरश्रीप्रदाय नमः।
Om Virashripradaya Namah।
जो लक्ष्मी प्रदान करने वाले हैं
- 677
विजयप्रद
ॐ विजयप्रदाय नमः।
Om Vijayapradaya Namah।
जो विजय प्रदान करने वाले हैं
- 678
सर्ववश्यकर
ॐ सर्ववश्यकराय नमः।
Om Sarvavashyakaraya Namah।
जो सभी को भक्त के वश में कर देने वाले हैं
- 679
गर्भदोषहा
ॐ गर्भदोषघ्ने नमः।
Om Garbhadoshaghne Namah।
जो गर्भ की रक्षा अथवा गर्भपात आदि दोषों को दूर करने वाले हैं
- 680
पुत्रपौत्रद
ॐ पुत्रपौत्रदाय नमः।
Om Putrapautradaya Namah।
जो पुत्र और पौत्र प्रदान करने वाले हैं
- 681
मेधाद
ॐ मेधादाय नमः।
Om Medhadaya Namah।
जो विशिष्ट बुद्धि प्रदान करने वाले हैं
- 682
कीर्तिद
ॐ कीर्तिदाय नमः।
Om Kirtidaya Namah।
जो लोक में प्रसिद्धि प्रदान करने वाले हैं
- 683
शोकहारी
ॐ शोकहारिणे नमः।
Om Shokaharine Namah।
जो दुख का नाश करने वाले हैं
- 684
दौर्भाग्यनाशन
ॐ दौर्भाग्यनाशनाय नमः।
Om Daurbhagyanashanaya Namah।
जो स्त्रियों के विधवापन आदि दुर्भाग्यसूचक दोषों का नाश करने वाले हैं
- 685
प्रतिवादिमुखस्तम्भ
ॐ प्रतिवादिमुखस्तम्भाय नमः।
Om Prativadimukhastambhaya Namah।
जो शत्रुओं का दमन करने वाले हैं
- 686
रुष्टचित्तप्रसादन
ॐ रुष्टचित्तप्रसादनाय नमः।
Om Rushtachittaprasadanaya Namah।
जो क्रोधित राजा आदि को शान्त एवं प्रसन्न करने वाले हैं
- 687
पराभिचारशमन
ॐ पराभिचारशमनाय नमः।
Om Parabhicharashamanaya Namah।
जो दूसरों द्वारा किये गये मारण मोहन आदि उपायों को नष्ट करने वाले हैं
- 688
दुःखभञ्जनकारक
ॐ दुःखभञ्जनकारकाय नमः।
Om Duhkhabhanjanakarakaya Namah।
जो समस्त दुखों का नाश करने वाले हैं
- 689
लव
ॐ लवाय नमः।
Om Lavaya Namah।
जो अति सूक्ष्म हैं
- 690
त्रुटि
ॐ त्रुटये नमः।
Om Trutaye Namah।
जो काल गणना के अनुसार एक हजार लव के काल के समान हैं
- 691
कला
ॐ कलायै नमः।
Om Kalayai Namah।
जो काल गणना के अनुसार तीस काष्ठाओं के काल के समान हैं
- 692
काष्ठा
ॐ काष्ठायै नमः।
Om Kashthayai Namah।
जो काल गणना के अनुसार अठारह निमेष के समान समय वाले हैं
- 693
निमेष
ॐ निमेषाय नमः।
Om Nimeshaya Namah।
जो काल गणना के अनुसार तीस तत्पर काल के समान समय वाले हैं
- 694
तत्पर
ॐ तत्पराय नमः।
Om Tatparaya Namah।
जो काल गणना के अनुसार सौ त्रुटियों के समय के बराबर हैं
- 695
क्षण
ॐ क्षणाय नमः।
Om Kshanaya Namah।
जो काल गणनानुसार क्षण स्वरूप अर्थात् तीस कलाओं के समय के बराबर हैं
- 696
घटी
ॐ घट्यै नमः।
Om Ghatyai Namah।
जो काल गणनानुसार घटी स्वरूप अर्थात् छः क्षण के समान समय वाले हैं
- 697
मुहूर्त
ॐ मुहूर्ताय नमः।
Om Muhurtaya Namah।
जो काल गणनानुसार दो घटी के समान समय वाले हैं
- 698
प्रहर
ॐ प्रहराय नमः।
Om Praharaya Namah।
जो काल गणनानुसार चार मूहूर्त के समय के समान हैं
- 699
दिवानक्त
ॐ दिवानक्ताय नमः।
Om Divanaktaya Namah।
जो काल गणनानुसार रात्रि स्वरूप हैं
- 700
अहर्निश
ॐ अहर्निशाय नमः।
Om Aharnishaya Namah।
जो काल गणनानुसार दिन और रात के समय के समान समय वाले हैं
- 701
पक्ष
ॐ पक्षाय नमः।
Om Pakshaya Namah।
जो पन्द्रह दिन अर्थात् एक पक्ष स्वरूप हैं
- 702
मास
ॐ मासाय नमः।
Om Masaya Namah।
जो दो पक्ष अर्थात् एक माह स्वरूप हैं
- 703
अयन
ॐ अयनाय नमः।
Om Ayanaya Namah।
जो छः माह अर्थात् एक अयन स्वरूप हैं
- 704
वर्ष
ॐ वर्षाय नमः।
Om Varshaya Namah।
जो दो अयन (उत्तरायण और दक्षिणायन) अर्थात् वर्ष स्वरूप हैं
- 705
युग
ॐ युगाय नमः।
Om Yugaya Namah।
जो युग स्वरूप अर्थात् बारह हजार दिव्य वर्षों के समान हैं
- 706
कल्प
ॐ कल्पाय नमः।
Om Kalpaya Namah।
जो कल्प (ब्रह्मा जी का एक दिन) स्वरूप अर्थात् एक हजार चतुर्युग के समान हैं
- 707
महालय
ॐ महालयाय नमः।
Om Mahalayaya Namah।
जो बहत्तर हजार कल्प अर्थात् महाप्रलय (ब्रह्मा जी का भी जब लय हो जाता है) स्वरूप हैं
- 708
राशि
ॐ राशये नमः।
Om Rashaye Namah।
जो मेष आदि बारह राशिस्वरूप हैं
- 709
तारा
ॐ तारायै नमः।
Om Tarayai Namah।
जो कृत्तिका आदि नक्षत्रस्वरूप हैं
- 710
तिथि
ॐ तिथये नमः।
Om Tithaye Namah।
जो पंचाङ्ग में चन्द्रमा की पन्द्रह कलाओं में से एक तिथि स्वरूप हैं
- 711
योग
ॐ योगाय नमः।
Om Yogaya Namah।
जो पंचाङ्ग में अमृतसिद्धि एवं आनन्द आदि योग के रूप में विद्यमान हैं
- 712
वार
ॐ वाराय नमः।
Om Varaya Namah।
जो सप्ताह के सात वार के स्वरूप में विद्यमान हैं
- 713
करण
ॐ करणाय नमः।
Om Karanaya Namah।
जो पंचाङ्ग में बव आदि करण के रूप में विद्यमान हैं
- 714
अंशक
ॐ अंशकाय नमः।
Om Amshakaya Namah।
जो ज्योतिष में समस्त अंशों के रूप में रहने वाले हैं
- 715
लग्न
ॐ लग्नाय नमः।
Om Lagnaya Namah।
जो ज्योतिष में मेष आदि राशियों के उदय करने वाले लग्नस्वरूप हैं
- 716
होरा
ॐ होरायै नमः।
Om Horayai Namah।
जो ज्योतिष में होरा चक्र के रूप में विद्यमान रहने वाले हैं
- 717
कालचक्र
ॐ कालचक्राय नमः।
Om Kalachakraya Namah।
जो स्वयं काल के स्वरूप हैं
- 718
मेरु
ॐ मेरवे नमः।
Om Merave Namah।
जो मेरु के पर्वत रूप में विद्यमान हैं
- 719
सप्तर्षि
ॐ सप्तर्षिभ्यो नमः।
Om Saptarshibhyo Namah।
जो कश्यप आदि सप्तऋषि स्वरूप हैं
- 720
ध्रुव
ॐ ध्रुवाय नमः।
Om Dhruvaya Namah।
जो उत्तानपाद के पुत्रस्वरूप हैं
- 721
राहु
ॐ राहवे नमः।
Om Rahave Namah।
जो राहु ग्रह स्वरूप हैं
- 722
मन्द
ॐ मन्दाय नमः।
Om Mandaya Namah।
जो शनि ग्रह स्वरूप हैं
- 723
कवि
ॐ कवये नमः।
Om Kavaye Namah।
जो शुक्र ग्रह स्वरूप हैं
- 724
जीव
ॐ जीवाय नमः।
Om Jivaya Namah।
जो बृहस्पति ग्रह स्वरूप हैं
- 725
बुध
ॐ बुधाय नमः।
Om Budhaya Namah।
जो बुध ग्रह स्वरूप हैं
- 726
भौम
ॐ भौमाय नमः।
Om Bhaumaya Namah।
जो मङ्गल ग्रह स्वरूप हैं
- 727
शशी
ॐ शशिने नमः।
Om Shashine Namah।
जो चन्द्र ग्रह स्वरूप हैं
- 728
रवि
ॐ रवये नमः।
Om Ravaye Namah।
जो सूर्य ग्रह स्वरूप हैं
- 729
काल
ॐ कालाय नमः।
Om Kalaya Namah।
जो जगत का संहार करने वाले हैं
- 730
सृष्टि
ॐ सृष्टये नमः।
Om Srishtaye Namah।
जो सृष्टि की रचना करने वाले हैं
- 731
स्थिति
ॐ स्थितये नमः।
Om Sthitaye Namah।
जो सृष्टि का पालन करने वाले हैं
- 732
विश्व स्थावर जङ्गम
ॐ विश्वस्मै स्थावराय जङ्गमाय नमः।
Om Vishvasmai Sthavaraya Jangamaya Namah।
जो चराचर जगत स्वरूप हैं
- 733
भू
ॐ भुवे नमः।
Om Bhuve Namah।
जो पृथ्वी स्वरूप हैं
- 734
आप
ॐ अद्भ्यो नमः।
Om Adbhyo Namah।
जो जल स्वरूप हैं
- 735
अग्नि
ॐ अग्नये नमः।
Om Agnaye Namah।
जो अग्नि स्वरूप हैं
- 736
मरुत्
ॐ मरुते नमः।
Om Marute Namah।
जो वायु स्वरूप हैं
- 737
व्योम
ॐ व्योम्ने नमः।
Om Vyomne Namah।
जो आकाश स्वरूप हैं
- 738
अहङ्कृति
ॐ अहंकृतये नमः।
Om Ahamkritaye Namah।
जो अहंकार स्वरूप हैं
- 739
प्रकृति
ॐ प्रकृतये नमः।
Om Prakritaye Namah।
जो जगत के मूल कारण प्रकृति स्वरूप हैं
- 740
पुमान्
ॐ पुंसे नमः।
Om Pumse Namah।
जो पुरुष स्वरूप हैं
- 741
ब्रह्मा
ॐ ब्रह्मणे नमः।
Om Brahmane Namah।
जो ब्रह्मा स्वरूप अर्थात् सृष्टि के सृजनकर्ता हैं
- 742
विष्णु
ॐ विष्णवे नमः।
Om Vishnave Namah।
जो विष्णु स्वरूप अर्थात् सृष्टि के पालनकर्ता हैं
- 743
शिव
ॐ शिवाय नमः।
Om Shivaya Namah।
जो शिव स्वरूप अर्थात् सृष्टि के संहारकर्ता हैं
- 744
रुद्र
ॐ रुद्राय नमः।
Om Rudraya Namah।
जो रुद्र स्वरूप हैं
- 745
ईश
ॐ ईशाय नमः।
Om Ishaya Namah।
जो ईश्वर स्वरूप हैं
- 746
शक्ति
ॐ शक्तये नमः।
Om Shaktaye Namah।
जो शक्ति स्वरूप हैं
- 747
सदाशिव
ॐ सदाशिवाय नमः।
Om Sadashivaya Namah।
जो सदैव कल्याण करने वाले हैं
- 748
त्रिदश
ॐ त्रिदशेभ्यो नमः।
Om Tridashebhyo Namah।
जो देवगणों के समान हैं
- 749
पितृ
ॐ पितृभ्यो नमः।
Om Pitribhyo Namah।
जो पितरों के समान हैं
- 750
सिद्ध
ॐ सिद्धेभ्यो नमः।
Om Siddhebhyo Namah।
जो समस्त सिद्धियों के समान हैं
- 751
यक्ष
ॐ यक्षेभ्यो नमः।
Om Yakshebhyo Namah।
जो यक्षगणों के समान हैं
- 752
रक्ष
ॐ रक्षोभ्यो नमः।
Om Rakshobhyo Namah।
जो राक्षसगणों के समान हैं
- 753
किन्नर
ॐ किन्नरेभ्यो नमः।
Om Kinnarebhyo Namah।
जो किन्नरवर्ग के समान हैं
- 754
साध्य
ॐ साध्येभ्यो नमः।
Om Sadhyebhyo Namah।
जो साधकजनों के समान हैं
- 755
विद्याधर
ॐ विद्याधरेभ्यो नमः।
Om Vidyadharebhyo Namah।
जो विद्याधारण करने वाले गणों के समान हैं
- 756
भूत
ॐ भूतेभ्यो नमः।
Om Bhutebhyo Namah।
जो स्वयं भूतगणों के रूप में हैं
- 757
मनुष्य
ॐ मनुष्येभ्यो नमः।
Om Manushyebhyo Namah।
जो मनुष्यगणों के रूप में हैं
- 758
पशु
ॐ पशुभ्यो नमः।
Om Pashubhyo Namah।
जो पशुगणों के समान हैं
- 759
खग
ॐ खगेभ्यो नमः।
Om Khagebhyo Namah।
जो पक्षिगण स्वरूप हैं
- 760
समुद्र
ॐ समुद्रेभ्यो नमः।
Om Samudrebhyo Namah।
जो विभिन्न समुद्रों के रूप में विद्यमान हैं
- 761
सरित्
ॐ सरिद्भ्यो नमः।
Om Saridbhyo Namah।
जो नदियों के रूप में प्रवाहित होते हैं
- 762
शैल
ॐ शैलेभ्यो नमः।
Om Shailebhyo Namah।
जो पर्वतों के रूप में विद्यमान हैं
- 763
भूत
ॐ भूताय नमः।
Om Bhutaya Namah।
जो भूतकाल स्वरूप हैं
- 764
भव्य
ॐ भव्याय नमः।
Om Bhavyaya Namah।
जो भविष्यकाल स्वरूप हैं
- 765
भवोद्भव
ॐ भवोद्भवाय नमः।
Om Bhavodbhavaya Namah।
जो जगत की उत्पत्ति के कारण हैं
- 766
साङ्ख्य
ॐ साङ्ख्याय नमः।
Om Sankhyaya Namah।
जो कपिल मुनि प्रणीत साङ्ख्य दर्शन स्वरूप हैं
- 767
पातञ्जल
ॐ पातञ्जलाय नमः।
Om Patanjalaya Namah।
जो पतञ्जलि मुनि प्रणीत योगसूत्र रूप में विद्यमान हैं
- 768
योग
ॐ योगाय नमः।
Om Yogaya Namah।
जो नागराज शेष द्वारा प्रतिपादित योग रूप हैं
- 769
पुराण
ॐ पुराणेभ्यो नमः।
Om Puranebhyo Namah।
जो समस्त पुराणों के रूप में हैं
- 770
श्रुति
ॐ श्रुत्यै नमः।
Om Shrutyai Namah।
जो स्वयं वेदस्वरूप हैं
- 771
स्मृति
ॐ स्मृत्यै नमः।
Om Smrityai Namah।
जो मनुस्मृति आदि धर्मशास्त्र स्वरूप हैं
- 772
वेदाङ्ग
ॐ वेदाङ्गेभ्यो नमः।
Om Vedangebhyo Namah।
जो छः वेदाङ्गों के रूप में विराजमान हैं
- 773
सदाचार
ॐ सदाचाराय नमः।
Om Sadacharaya Namah।
जो सदाचार संग्रहात्मक ग्रन्थ स्वरूप हैं
- 774
मीमांसा
ॐ मीमांसायै नमः।
Om Mimamsayai Namah।
जो जैमिनि मुनि प्रणीत मीमांसा दर्शन के रूप में अवस्थित हैं
- 775
न्यायविस्तर
ॐ न्यायविस्तराय नमः।
Om Nyayavistaraya Namah।
जो गौतम मुनि द्वारा वर्णित न्याय दर्शन स्वरूप हैं
- 776
आयुर्वेद
ॐ आयुर्वेदाय नमः।
Om Ayurvedaya Namah।
जो आयुर्वेद के रूप में विद्यमान हैं
- 777
धनुर्वेद
ॐ धनुर्वेदाय नमः।
Om Dhanurvedaya Namah।
जो स्वयं अस्त्रविद्या अर्थात् धनुर्वेद के रूप में विराजमान हैं
- 778
गान्धर्व
ॐ गान्धर्वाय नमः।
Om Gandharvaya Namah।
जो संगीत शास्त्र अर्थात् गन्धर्व वेद स्वरूप हैं
- 779
काव्यनाटक
ॐ काव्यनाटकाय नमः।
Om Kavyanatakaya Namah।
जो साहित्य शास्त्र में वर्णित काव्य एवं नाटक के रूप में विद्यमान हैं
- 780
वैखानस
ॐ वैखानसाय नमः।
Om Vaikhanasaya Namah।
जो भगवान विष्णु द्वारा कथित वैखानस तन्त्र स्वरूप हैं
- 781
भागवत
ॐ भागवताय नमः।
Om Bhagavataya Namah।
जो स्वयं वैष्णवशास्त्र अर्थात् भागवत स्वरूप में अवस्थित हैं
- 782
सात्वत
ॐ सात्वताय नमः।
Om Satvataya Namah।
जो सात्वत तन्त्र स्वरूप हैं
- 783
पाञ्चरात्रक
ॐ पाञ्चरात्रकाय नमः।
Om Pancharatrakaya Namah।
जो पाञ्चरात्र आगम स्वरूप अर्थात् चारों वैष्णव तन्त्र स्वरूप हैं
- 784
शैव
ॐ शैवाय नमः।
Om Shaivaya Namah।
जो शैव तन्त्र हैं
- 785
पाशुपत
ॐ पाशुपताय नमः।
Om Pashupataya Namah।
जो पाशुपत शास्त्र हैं
- 786
कालामुख
ॐ कालामुखाय नमः।
Om Kalamukhaya Namah।
जो कालामुख नामक प्रसिद्ध तन्त्र अथवा सम्प्रदाय के स्वरूप हैं
- 787
भैरवशासन
ॐ भैरवशासनाय नमः।
Om Bhairavashasanaya Namah।
जो भैरव कथित चारों शैव तन्त्र के रूप में विद्यमान हैं
- 788
शाक्त
ॐ शाक्ताय नमः।
Om Shaktaya Namah।
जो शक्तितन्त्र हैं
- 789
वैनायक
ॐ वैनायकाय नमः।
Om Vainayakaya Namah।
जो विनायकतन्त्र स्वरूप हैं
- 790
सौर
ॐ सौराय नमः।
Om Sauraya Namah।
जो भगवान सूर्य द्वारा कथित तन्त्र स्वरूप हैं
- 791
जैन
ॐ जैनाय नमः।
Om Jainaya Namah।
जो स्वयं जैन शास्त्र के रूप में विद्यमान हैं
- 792
आर्हतसंहिता
ॐ आर्हतसंहितायै नमः।
Om Arhatasamhitayai Namah।
जो आर्हतशास्त्र अर्थात् जैन धर्म के विशिष्ट ग्रन्थ के रूप में अवस्थित हैं
- 793
सत्
ॐ सते नमः।
Om Sate Namah।
जो सभी के कारण के रूप में स्थित हैं
- 794
असत्
ॐ असते नमः।
Om Asate Namah।
जो सभी के कार्य के रूप में विद्यमान हैं
- 795
व्यक्त
ॐ व्यक्ताय नमः।
Om Vyaktaya Namah।
जो कार्य रूप में व्यक्त अर्थात् प्रत्यक्ष हैं
- 796
अव्यक्त
ॐ अव्यक्ताय नमः।
Om Avyaktaya Namah।
जो कार्य के कारण रूप में अर्थात् अप्रत्यक्ष हैं
- 797
सचेतन
ॐ सचेतनाय नमः।
Om Sachetanaya Namah।
जो सजीव अर्थात् चेतना से युक्त हैं
- 798
अचेतन
ॐ अचेतनाय नमः।
Om Achetanaya Namah।
जो निर्जीव अर्थात् चेतना से रहित हैं
- 799
बन्ध
ॐ बन्धाय नमः।
Om Bandhaya Namah।
जो स्वयं भ्रमरूपी बन्धन हैं
- 800
मोक्ष
ॐ मोक्षाय नमः।
Om Mokshaya Namah।
जो मोक्षस्वरूप हैं
- 801
सुख
ॐ सुखाय नमः।
Om Sukhaya Namah।
जो विशुद्ध आनन्द स्वरूप हैं
- 802
भोग
ॐ भोगाय नमः।
Om Bhogaya Namah।
जो अनुभव योग्य हैं
- 803
अयोग
ॐ अयोगाय नमः।
Om Ayogaya Namah।
जो आसक्ति रहित हैं
- 804
सत्य
ॐ सत्याय नमः।
Om Satyaya Namah।
जिनका तीनों कालों में निर्बाध रूप से संचार हैं
- 805
अणु
ॐ अणवे नमः।
Om Anave Namah।
जो मन आदि इन्द्रियों के अगोचर हैं
- 806
महान्
ॐ महते नमः।
Om Mahate Namah।
जो परम आनन्द स्वरूप हैं
- 807
स्वस्ति
ॐ स्वस्तये नमः।
Om Svastaye Namah।
जो कल्याण स्वरूप अथवा सत्ताधारी हैं
- 808
हुं
ॐ हुं नमः।
Om Hum Namah।
जो हुं बीज मन्त्र में विद्यमान हैं
- 809
फट्
ॐ फट् नमः।
Om Phat Namah।
जो बीज मन्त्र स्वरूप हैं
- 810
स्वधा
ॐ स्वधा नमः।
Om Svadha Namah।
जो सर्वशक्तिशाली मन्त्र अथवा श्राद्ध कर्म स्वरूप हैं
- 811
स्वाहा
ॐ स्वाहा नमः।
Om Svaha Namah।
जो यज्ञ कर्म स्वरूप हैं
- 812
श्रौषट्
ॐ श्रौषट् नमः।
Om Shraushat Namah।
जो श्रौषट् मन्त्र स्वरूप हैं
- 813
वौषट्
ॐ वौषट् नमः।
Om Vaushat Namah।
जो वौषट् मन्त्र स्वरूप हैं
- 814
वषण्णमः
ॐ वषट् नमः।
Om Vashat Namah।
जो वषट् मन्त्र स्वरूप हैं
- 815
नमो नमः
ॐ नमो नमः।
Om Namo Namah।
जो अभिवादन स्वरूप हैं
- 816
ज्ञान
ॐ ज्ञानाय नमः।
Om Jnanaya Namah।
जो मोक्षविषयक ज्ञानस्वरूप हैं
- 817
विज्ञान
ॐ विज्ञानाय नमः।
Om Vijnanaya Namah।
जो विज्ञान स्वरूप में विद्यमान हैं
- 818
आनन्द
ॐ आनन्दाय नमः।
Om Anandaya Namah।
जो आत्मानन्द स्वरूप हैं
- 819
बोध
ॐ बोधाय नमः।
Om Bodhaya Namah।
जो अन्तर्बोध स्वरूप अर्थात् अन्तरिन्द्रिय द्वारा जानने योग्य हैं
- 820
संविद
ॐ संविदे नमः।
Om Samvide Namah।
जो बाह्य वृत्तियों द्वारा दुष्प्राप्य हैं
- 821
शम
ॐ शमाय नमः।
Om Shamaya Namah।
जो मन के निग्रह स्वरूप हैं
- 822
यम
ॐ यमाय नमः।
Om Yamaya Namah।
जो इन्द्रियों पर संयम रखने वाले हैं
- 823
एक
ॐ एकस्मै नमः।
Om Ekasmai Namah।
जो एकमात्र अद्वितीय ब्रह्म हैं
- 824
एकाक्षराधार
ॐ एकाक्षराधाराय नमः।
Om Ekaksharadharaya Namah।
जो एकाक्षर गं बीजमात्र में स्थित रहने वाले हैं
- 825
एकाक्षरपरायण
ॐ एकाक्षरपरायणाय नमः।
Om Ekaksharaparayanaya Namah।
जो ॐ एकाक्षर में स्थित रहने वाले हैं
- 826
एकाग्रधी
ॐ एकाग्रधिये नमः।
Om Ekagradhiye Namah।
जो अत्यन्त एकाग्र रहने वाले हैं
- 827
एकवीर
ॐ एकवीराय नमः।
Om Ekaviraya Namah।
जो सर्वशक्तिमान एकमात्र वीर स्वरूप हैं
- 828
एकानेकस्वरूपधृश्
ॐ एकानेकस्वरूपधृषे नमः।
Om Ekanekasvarupadhrishe Namah।
जो एक होते हुए भी अनेक रूपों को धारण करने वाले हैं
- 829
द्विरूप
ॐ द्विरूपाय नमः।
Om Dvirupaya Namah।
जो सगुण और निर्गुण दोनों रूपों में स्थित हैं
- 830
द्विभुज
ॐ द्विभुजाय नमः।
Om Dvibhujaya Namah।
जो दो भुजाओं वाले हैं
- 831
द्व्यक्ष
ॐ द्व्यक्षाय नमः।
Om Dvyakshaya Namah।
जो दो नेत्रों वाले हैं
- 832
द्विरद
ॐ द्विरदाय नमः।
Om Dviradaya Namah।
जो तो दाँत वाले अर्थात् गज के रूप में रहने वाले हैं
- 833
द्वीपरक्षक
ॐ द्वीपरक्षकाय नमः।
Om Dviparakshakaya Namah।
जो सातों द्वीपों के रक्षक हैं
- 834
द्वैमातुर
ॐ द्वैमातुराय नमः।
Om Dvaimaturaya Namah।
जो माता उमा और गङ्गा के पुत्र हैं
- 835
द्विवदन
ॐ द्विवदनाय नमः।
Om Dvivadanaya Namah।
जो दो मुख अर्थात् अग्निमुख और गजमुख वाले हैं
- 836
द्वन्द्वातीत
ॐ द्वन्द्वातीताय नमः।
Om Dvandvatitaya Namah।
जो शीत उष्ण आदि द्वन्द दुःखों से रहित हैं
- 837
द्व्यातिग
ॐ द्वयातिगाय नमः।
Om Dvayatigaya Namah।
जो रजोगुण और तमोगुण से परे हैं
- 838
त्रिधामा
ॐ त्रिधाम्ने नमः।
Om Tridhamne Namah।
जो सूर्य, चन्द्र और अग्नि इन तीनों तेजों से युक्त हैं
- 839
त्रिकर
ॐ त्रिकराय नमः।
Om Trikaraya Namah।
जो तीनों लोकों के कर्ता हैं
- 840
त्रेतात्रिवर्गफलदायक
ॐ त्रेतात्रिवर्गफलदायकाय नमः।
Om Tretatrivargaphaladayakaya Namah।
जो धर्म, अर्थ और काम रूपी फल प्रदान करने वाले हैं
- 841
त्रिगुणात्मा
ॐ त्रिगुणात्मने नमः।
Om Trigunatmane Namah।
जो सत्त्व, रज और तम तीनों गुणों से युक्त प्रकृति के आधार हैं
- 842
त्रिलोकादि
ॐ त्रिलोकादये नमः।
Om Trilokadaye Namah।
जो तीनों लोकों के आदि कारण हैं
- 843
त्रिशक्तीश
ॐ त्रिशक्तीशाय नमः।
Om Trishaktishaya Namah।
जो प्रभुशक्ति, उत्साहशक्ति और मन्त्रशक्ति नामक त्रिशक्तियों के स्वामी हैं
- 844
त्रिलोचन
ॐ त्रिलोचनाय नमः।
Om Trilochanaya Namah।
जो तीन नेत्र वाले हैं
- 845
चतुर्बाहु
ॐ चतुर्बाहवे नमः।
Om Chaturbahave Namah।
जो चार भुजाओं वाले हैं
- 846
चतुर्दन्त
ॐ चतुर्दन्ताय नमः।
Om Chaturdantaya Namah।
जो चार दातों वाले हैं
- 847
चतुरात्मा
ॐ चतुरात्मने नमः।
Om Chaturatmane Namah।
जो आत्मा, अन्तरात्मा, ज्ञानात्मा और परमात्मा नामक चार आत्माओं वाले हैं
- 848
चतुर्मुख
ॐ चतुर्मुखाय नमः।
Om Chaturmukhaya Namah।
जो चार मुख वाले हैं
- 849
चतुर्विधोपायमय
ॐ चतुर्विधोपायमयाय नमः।
Om Chaturvidhopayamayaya Namah।
जो साम, दाम, दण्ड, भेद चार उपायों से उत्पन्न फल के साधक हैं
- 850
चतुर्वर्णाश्रमाश्रय
ॐ चतुर्वर्णाश्रमाश्रयाय नमः।
Om Chaturvarnashramashrayaya Namah।
जो चारों वर्णों और चारों आश्रमों के आधार हैं
- 851
चतुर्विधवचोवृत्तिपरिवृत्तिप्रवर्तक
ॐ चतुर्विधवचोवृत्तिपरिवृत्तिप्रवर्तकाय नमः।
Om Chaturvidhavachovrittiparivrittipravartakaya Namah।
जो चार प्रकार की वाणी (परा, पश्यन्ति, मध्यमा, बैखरी) के अधिपति हैं
- 852
चतुर्थीपूजनप्रीत
ॐ चतुर्थीपूजनप्रीताय नमः।
Om Chaturthipujanapritaya Namah।
जो चतुर्थी पर पूजन से प्रसन्न होने वाले हैं
- 853
चतुर्थीतिथिसम्भव
ॐ चतुर्थीतिथिसम्भवाय नमः।
Om Chaturthitithisambhavaya Namah।
जो चतुर्थी तिथि पर प्रकट होने वाले हैं
- 854
पञ्चाक्षरात्मा
ॐ पञ्चाक्षरात्मने नमः।
Om Panchaksharatmane Namah।
जो अकार, उकार, मकार, नाद और बिन्दु (पञ्चाक्षर ॐ) में निवास करने वाले हैं
- 855
पञ्चात्मा
ॐ पञ्चात्मने नमः।
Om Panchatmane Namah।
जो पञ्चात्मा ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, ईश्वर और सदाशिव इन पाँच विग्रहों से युक्त हैं
- 856
पञ्चास्य
ॐ पञ्चास्याय नमः।
Om Panchasyaya Namah।
जो पाँच मुख वाले हैं
- 857
पञ्चकृत्यकृत्
ॐ पञ्चकृत्यकृते नमः।
Om Panchakrityakrite Namah।
जो सृष्टि, पालन, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह करने वाले हैं
- 858
पञ्चाधार
ॐ पञ्चाधाराय नमः।
Om Panchadharaya Namah।
जो प्रकृति के पञ्चतत्वों को धारण करने वाले हैं
- 859
पञ्चवर्ण
ॐ पञ्चवर्णाय नमः।
Om Panchavarnaya Namah।
जो पाँच वर्ण वाले हैं
- 860
पञ्चाक्षरपरायण
ॐ पञ्चाक्षरपरायणाय नमः।
Om Panchaksharaparayanaya Namah।
जो नित्य शिव पञ्चाक्षर मन्त्र (नमः शिवाय) का जाप करने वाले हैं
- 861
पञ्चताल
ॐ पञ्चतालाय नमः।
Om Panchatalaya Namah।
जो पाँच ताल के बराबर शरीरवाले अर्थात् वामनरूपी हैं
- 862
पञ्चकर
ॐ पञ्चकराय नमः।
Om Panchakaraya Namah।
जो पाँच हाथों वाले होने के कारण पञ्चकर कहे जाने जाने वाले हैं
- 863
पञ्चप्रणवभावित
ॐ पञ्चप्रणवभाविताय नमः।
Om Panchapranavabhavitaya Namah।
जिन्हें पञ्च प्रणव द्वारा अनुभव किया जा सकता है
- 864
पञ्चब्रह्ममयस्फूर्ति
ॐ पञ्चब्रह्ममयस्फूर्तये नमः।
Om Panchabrahmamayasphurtaye Namah।
जो सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष और ईश्वर इन पाँच ब्रह्मस्वरूपों की शक्ति से युक्त हैं
- 865
पञ्चावरणवारित
ॐ पञ्चावरणवारिताय नमः।
Om Panchavaranavaritaya Namah।
जो अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनन्दमय इन पाँच कोषों से युक्त हैं
- 866
पञ्चभक्ष्यप्रिय
ॐ पञ्चभक्ष्यप्रियाय नमः।
Om Panchabhakshyapriyaya Namah।
जो पाँच प्रकार के भक्ष्य पदार्थों के प्रेमी हैं
- 867
पञ्चबाण
ॐ पञ्चबाणाय नमः।
Om Panchabanaya Namah।
जो कामेश्वरी उमा और कामेश्वर शिव के पाँच बीजों से युक्त हैं
- 868
पञ्चशिवात्मक
ॐ पञ्चशिवात्मकाय नमः।
Om Panchashivatmakaya Namah।
जो शिव के पाँच रूपों में स्थित रहने वाले हैं
- 869
षट्कोणपीठ
ॐ षट्कोणपीठाय नमः।
Om Shatkonapithaya Namah।
जो षट्भुज आसन पर विराजमान होने वाले हैं
- 870
षट्चक्रधामा
ॐ षट्चक्रधाम्ने नमः।
Om Shatchakradhamne Namah।
जो मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर, अनाहत, विशुद्धि एवं आज्ञा इन छः चक्रों में रहने वाले हैं
- 871
षड्ग्रन्थिभेदक
ॐ षड्ग्रन्थिभेदकाय नमः।
Om Shadgranthibhedakaya Namah।
जो छः प्रकार की ग्रन्थियों को भेदकर मुक्ति प्रदान करने वाले हैं
- 872
षडध्वध्वान्तविध्वंसी
ॐ षडध्वध्वान्तविध्वंसिने नमः।
Om Shadadhvadhvantavidhvamsine Namah।
जो छः प्रकार के अंधकारों को नष्ट करने वाले हैं
- 873
षडङ्गुलमहाह्रद
ॐ षडङ्गुलमहाह्रदाय नमः।
Om Shadangulamahahradaya Namah।
जो छः अंगुल गहरे नाभि वाले हैं
- 874
षण्मुख
ॐ षण्मुखाय नमः।
Om Shanmukhaya Namah।
जो छः शास्त्रों को मुख में धारण करने वाले हैं
- 875
षण्मुखभ्राता
ॐ षण्मुखभ्रात्रे नमः।
Om Shanmukhabhratre Namah।
जो छः मुख वाले कार्तिकेय के भ्राता हैं
- 876
षट्शक्तिपरिवारित
ॐ षट्शक्तिपरिवारिताय नमः।
Om Shatshaktiparivaritaya Namah।
जो छः प्रकार की शक्तियों से घिरे हुये हैं
- 877
षड्वैरिवर्गविध्वंसी
ॐ षड्वैरिवर्गविध्वंसिने नमः।
Om Shadvairivargavidhvamsine Namah।
जो काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर इन छः शत्रुओं का नाश करने वाले हैं
- 878
षडूर्मिभयभञ्जन
ॐ षडूर्मिभयभञ्जनाय नमः।
Om Shadurmibhayabhanjanaya Namah।
जो भूख, प्यास, शोक, मोह, जरा और मृत्यु इन छः ऊर्मियों के भय का निवारण करने वाले हैं
- 879
षट्तर्कदूर
ॐ षट्तर्कदूराय नमः।
Om Shattarkaduraya Namah।
जो छः शास्त्रों के परे हैं
- 880
षट्कर्मनिरत
ॐ षट्कर्मनिरताय नमः।
Om Shatkarmanirataya Namah।
जो षट्कर्म (यजन ,याजन, अध्ययन, अध्यापन, दान, प्रतिग्रह) में लीन हैं
- 881
षड्रसाश्रय
ॐ षड्रसाश्रयाय नमः।
Om Shadrasashrayaya Namah।
जो छः रस (मधुर, अम्ल, लवण, कटु, कषाय तथा तिक्त) में स्थित हैं
- 882
सप्तपातालचरण
ॐ सप्तपातालचरणाय नमः।
Om Saptapatalacharanaya Namah।
तल, अतल, आदि नीचे के सात लोक जिनके चरणों के आश्रित हैं
- 883
सप्तद्वीपोरुमण्डल
ॐ सप्तद्वीपोरुमण्डलाय नमः।
Om Saptadviporumandalaya Namah।
जम्बू आदि सात द्वीप जिनकी जङ्घाओं के रूप में स्थित हैं
- 884
सप्तस्वर्लोकमुकुट
ॐ सप्तस्वर्लोकमुकुटाय नमः।
Om Saptasvarlokamukutaya Namah।
जो भू लोक से लेकर गोलोक पर्यन्त सात स्वर्लोक जिनके मुकुट हैं
- 885
सप्तसप्तिवरप्रद
ॐ सप्तसप्तिवरप्रदाय नमः।
Om Saptasaptivarapradaya Namah।
जो सूर्य को वर प्रदान करने वाले हैं
- 886
सप्ताङ्गराज्यसुखद
ॐ सप्ताङ्गराज्यसुखदाय नमः।
Om Saptangarajyasukhadaya Namah।
जो सप्तांग राज्य सुख प्रदान करने वाले हैं
- 887
सप्तर्षिगणमण्डित
ॐ सप्तर्षिगणमण्डिताय नमः।
Om Saptarshiganamanditaya Namah।
जो कश्यप आदि सात ऋषियों तथा गण-देवताओं से सुशोभित हैं
- 888
सप्तछन्दोनिधि
ॐ सप्तछन्दोनिधये नमः।
Om Saptachhandonidhaye Namah।
जो गायत्री से लेकर जगती पर्यन्त सात वैदिक छन्दों के आश्रय हैं
- 889
सप्तहोता
ॐ सप्तहोत्रे नमः।
Om Saptahotre Namah।
जो होता से लेकर उद्गाता पर्यन्त सात होतृगण स्वरूप हैं
- 890
सप्तस्वराश्रय
ॐ सप्तस्वराश्रयाय नमः।
Om Saptasvarashrayaya Namah।
जो सात स्वरों (षड्ज, ऋषभ, गान्धार, मध्यम, पञ्चम, धैवत, निषाद) के आधार हैं
- 891
सप्ताब्धिकेलिकासार
ॐ सप्ताब्धिकेलिकासाराय नमः।
Om Saptabdhikelikasaraya Namah।
सातों समुद्र जिनके क्रीड़ा-सरोवर हैं
- 892
सप्तमातृनिषेवित
ॐ सप्तमातृनिषेविताय नमः।
Om Saptamatrinishevitaya Namah।
जो ब्राह्मी, माहेश्वरी आदि सात मातृकाओं से सेवित हैं
- 893
सप्तच्छन्दोमोदमद
ॐ सप्तच्छन्दोमोदमदाय नमः।
Om Saptachchhandomodamadaya Namah।
जो पथ्य नामक सात छन्दों से उत्पन्न आनन्द में लीन हैं
- 894
सप्तच्छन्दोमखप्रभु
ॐ सप्तच्छन्दोमखप्रभवे नमः।
Om Saptachchhandomakhaprabhave Namah।
जो सप्त छन्दों की ऊर्जा के स्रोत हैं
- 895
अष्टमूर्तिध्येयमूर्ति
ॐ अष्टमूर्तिध्येयमूर्तये नमः।
Om Ashtamurtidhyeyamurtaye Namah।
जो भगवान् शिव के द्वारा भी पूजनीय हैं
- 896
अष्टप्रकृतिकारण
ॐ अष्टप्रकृतिकारणाय नमः।
Om Ashtaprakritikaranaya Namah।
जो पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार इन आठ प्रकृतियों की उत्पत्ति के कारण हैं
- 897
अष्टाङ्गयोगफलभू
ॐ अष्टाङ्गयोगफलभुवे नमः।
Om Ashtangayogaphalabhuve Namah।
जो अष्टाङ्गयोग के माध्यम फल प्रदान करने वाले हैं
- 898
अष्टपत्राम्बुजासन
ॐ अष्टपत्राम्बुजासनाय नमः।
Om Ashtapatrambujasanaya Namah।
जो अष्टदल कमल पुष्प के आसान पर विराजमान रहने वाले हैं
- 899
अष्टशक्तिसमृद्धिश्री
ॐ अष्टशक्तिसमृद्धिश्रिये नमः।
Om Ashtashaktisamriddhishriye Namah।
जो तीव्रा, ज्वालिनी आदि अष्ट शक्तियों द्वारा पूजित होने के कारण श्रीसम्पन्न हैं
- 900
अष्टैश्वर्यप्रदायक
ॐ अष्टैश्वर्यप्रदायकाय नमः।
Om Ashtaishvaryapradayakaya Namah।
जो अणिमा आदि आठ सिद्धियों के दाता हैं
- 901
अष्टपीठोपपीठश्री
ॐ अष्टपीठोपपीठश्रिये नमः।
Om Ashtapithopapithashriye Namah।
जो अष्टपीठ एवं उपपीठों को ऐश्वर्य युक्त करने वाले हैं
- 902
अष्टमातृसमावृत
ॐ अष्टमातृसमावृताय नमः।
Om Ashtamatrisamavritaya Namah।
सप्त मातृका एवं महालक्ष्मी जिनके आवरण देव के रूप में विराजमान हैं
- 903
अष्टभैरवसेव्य
ॐ अष्टभैरवसेव्याय नमः।
Om Ashtabhairavasevyaya Namah।
जो बटुक आदि अष्ट भैरवों द्वारा पूजे जाने वाले हैं
- 904
अष्टवसुवन्द्य
ॐ अष्टवसुवन्द्याय नमः।
Om Ashtavasuvandyaya Namah।
जो धर से लेकर प्रभास तक आठ वसुओं द्वारा पूजे जाने वाले हैं
- 905
अष्टमूर्तिभृत्
ॐ अष्टमूर्तिभृते नमः।
Om Ashtamurtibhrite Namah।
जो अष्टमूर्ति रूप धारण करने वाले हैं
- 906
अष्टचक्रस्फुरन्मूर्ति
ॐ अष्टचक्रस्फुरन्मूर्तये नमः।
Om Ashtachakrasphuranmurtaye Namah।
जो अष्ट चक्र यन्त्र स्वरूप हैं
- 907
अष्टद्रव्यहविःप्रिय
ॐ अष्टद्रव्यहविःप्रियाय नमः।
Om Ashtadravyahavihpriyaya Namah।
जो ईख, सत्तू आदि अष्टद्रव्यों से प्रसन्न होने वाले हैं
- 908
नवनागासनाध्यासी
ॐ नवनागासनाध्यासिने नमः।
Om Navanagasanadhyasine Namah।
जो वासुकी, तक्षक, कुलक, कर्कोटक आदि नौ नागों के आसन पर बैठने वाले हैं
- 909
नवनिध्यनुशासिता
ॐ नवनिध्यनुशासित्रे नमः।
Om Navanidhyanushasitre Namah।
जो नौ निधियों पर शासन करने वाले हैं
- 910
नवद्वारपुराधार
ॐ नवद्वारपुराधाराय नमः।
Om Navadvarapuradharaya Namah।
जो नौ द्वारों वाली मानव देह के आधार हैं
- 911
नवाधारनिकेतन
ॐ नवाधारनिकेतनाय नमः।
Om Navadharaniketanaya Namah।
जो कुलाकुल, सहस्रार, मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और लम्बिका इन नौ आधारों में निवास करने वाले हैं
- 912
नवनारायणस्तुत्य
ॐ नवनारायणस्तुत्याय नमः।
Om Navanarayanastutyaya Namah।
जो धर्म, आदि, अनन्त, बदरी, रूप, शंकर, सुन्दर, लक्ष्मी और साध्य इन नौ नारायणों द्वारा पूजित हैं
- 913
नवदुर्गानिषेवित
ॐ नवदुर्गानिषेविताय नमः।
Om Navadurganishevitaya Namah।
नौदुर्गा जिनकी उपासना करती हैं
- 914
नवनाथमहानाथ
ॐ नवनाथमहानाथाय नमः।
Om Navanathamahanathaya Namah।
जो नौ नाथों (ज्ञान, प्रकाश, सत्य, आनन्द, विमर्श, स्वभाव, सुभग, प्रतिभ और पूर्ण) के महानाथ हैं
- 915
नवनागविभूषण
ॐ नवनागविभूषणाय नमः।
Om Navanagavibhushanaya Namah।
जो कर्कोटक आदि नौ नागों को आभूषण के रूप में धारण करने वाले हैं
- 916
नवरत्नविचित्राङ्ग
ॐ नवरत्नविचित्राङ्गाय नमः।
Om Navaratnavichitrangaya Namah।
जो नौ प्रकार के रत्नों से सुशोभित हैं
- 917
नवशक्तिशिरोधृत
ॐ नवशक्तिशिरोधृताय नमः।
Om Navashaktishirodhritaya Namah।
नवशक्तियाँ जिन्हें अपने मस्तक पर धारण करती हैं
- 918
दशात्मक
ॐ दशात्मकाय नमः।
Om Dashatmakaya Namah।
जो दसों दिशाओं में व्याप्त हैं
- 919
दशभुज
ॐ दशभुजाय नमः।
Om Dashabhujaya Namah।
जो दस भुजाओं वाले हैं
- 920
दशदिक्पतिवन्दित
ॐ दशदिक्पतिवन्दिताय नमः।
Om Dashadikpativanditaya Namah।
जो इन्द्र आदि दसों दिशाओं के दिक्पालों द्वारा पूजे जाने वाले हैं
- 921
दशाध्याय
ॐ दशाध्यायाय नमः।
Om Dashadhyayaya Namah।
जो चार वेद और छः अंगों के अध्येता हैं
- 922
दशप्राण
ॐ दशप्राणाय नमः।
Om Dashapranaya Namah।
जो प्राण, अपान, व्यान आदि दस प्रकार के प्राणों से युक्त हैं
- 923
दशेन्द्रियनियामक
ॐ दशेन्द्रियनियामकाय नमः।
Om Dashendriyaniyamakaya Namah।
जो पाँच ज्ञानेन्द्रियों एवं पाँच कर्मेन्द्रियों को वश में रखने वाले हैं
- 924
दशाक्षरमहामन्त्र
ॐ दशाक्षरमहामन्त्राय नमः।
Om Dashaksharamahamantraya Namah।
जो दस अक्षरवाले (ॐ हस्तिपिशाचिनी हुं स्वाहा) महामन्त्रस्वरूप स्वरूप हैं
- 925
दशाशाव्यापिविग्रह
ॐ दशाशाव्यापिविग्रहाय नमः।
Om Dashashavyapivigrahaya Namah।
जो दशों दिशाओं में व्याप्त शरीर वाले हैं
- 926
एकादशादि रुद्र स्तुत
ॐ एकदशादिभिः रुद्रैः स्तुताय नमः।
Om Ekadashadibhih Rudraih Stutaya Namah।
जो ग्यारह से लेकर एक हजार तक रुद्रों द्वारा पूजित हैं
- 927
एकादशाक्षर
ॐ एकादशाक्षराय नमः।
Om Ekadashaksharaya Namah।
जो ग्यारह अक्षर मन्त्र स्वरूप हैं
- 928
द्वादशोद्दण्डदोर्दण्ड
ॐ द्वादशोद्दण्डदोर्दण्डाय नमः।
Om Dvadashoddandadordandaya Namah।
जो बारह भुजाओं वाले दण्डधारी स्वरूप में विरजमान हैं
- 929
द्वादशान्तनिकेतन
ॐ द्वादशान्तनिकेतनाय नमः।
Om Dvadashantaniketanaya Namah।
जो ललाट से लेकर ब्रह्मरन्ध्र तक अर्थात् द्वादशान्त में निवास करने हैं
- 930
त्रयोदशभिदाभिन्नविश्वेदेवाधिदैवत
ॐ त्रयोदशभिदाभिन्नविश्वेदेवाधिदैवताय नमः।
Om Trayodashabhidabhinnavishvedevadhidaivataya Namah।
जो तेरह विश्वेदेवों के अधिदेवता हैं
- 931
चतुर्दशेन्द्रवरद
ॐ चतुर्दशेन्द्रवरदाय नमः।
Om Chaturdashendravaradaya Namah।
जो चौदह प्रकार के इन्द्रों को वर प्रदान करने वाले हैं
- 932
चतुर्दशमनुप्रभु
ॐ चतुर्दशमनुप्रभवे नमः।
Om Chaturdashamanuprabhave Namah।
जो चौदह प्रकार के मनुओं के अधिपति हैं
- 933
चतुर्दशादिविद्याढ्य
ॐ चतुर्दशादिविद्याढ्याय नमः।
Om Chaturdashadividyadhyaya Namah।
जो चौदह प्रकार की विद्याओं में पारंगत हैं
- 934
चतुर्दशजगत्प्रभु
ॐ चतुर्दशजगत्प्रभवे नमः।
Om Chaturdashajagatprabhave Namah।
जो चौदह भुवनों (सप्त ऊर्ध्वलोक एवं सप्त पाताल लोक) के स्वामी हैं
- 935
सामपञ्चदश
ॐ सामपञ्चदशाय नमः।
Om Samapanchadashaya Namah।
जो सामवेद के पन्द्रह भागों के रूप में विद्यमान हैं
- 936
पञ्चदशीशीतांशुनिर्मल
ॐ पञ्चदशीशीतांशुनिर्मलाय नमः।
Om Panchadashishitamshunirmalaya Namah।
जो पूर्णिमा के चन्द्रमा के समान शीतल एवं निर्मल हैं
- 937
षोडशाधारनिलय
ॐ षोडशाधारनिलयाय नमः।
Om Shodashadharanilayaya Namah।
जो मानव शरीर के सोलह आधारों के रूप में स्थित रहने वाले हैं
- 938
षोडशस्वरमातृक
ॐ षोडशस्वरमातृकाय नमः।
Om Shodashasvaramatrikaya Namah।
जो सोलह स्वर अक्षर स्वरूप हैं
- 939
षोडशान्तपदावास
ॐ षोडशान्तपदावासाय नमः।
Om Shodashantapadavasaya Namah।
जो षोडशान्त (ब्रह्मरन्ध्र अन्तर्गत) में निवास करने वाले हैं
- 940
षोडशेन्दुकलात्मक
ॐ षोडशेन्दुकलात्मकाय नमः।
Om Shodashendukalatmakaya Namah।
जो अमृता और मानिनी आदि सोलह कलाओं से युक्त चन्द्र के समान हैं
- 941
कलासप्तदशी
ॐ कलासप्तदश्यै नमः।
Om Kalasaptadashyai Namah।
जो त्रिपुरागम में प्रसिद्ध सप्तदशी नामक कलास्वरूप हैं
- 942
सप्तदश
ॐ सप्तदशाय नमः।
Om Saptadashaya Namah।
जो सत्रह यज्ञों के स्वरूप हैं
- 943
सप्तदशाक्षर
ॐ सप्तदशाक्षराय नमः।
Om Saptadashaksharaya Namah।
जो सत्रह अक्षर वाले मन्त्र में स्थित हैं
- 944
अष्टादशद्वीपपति
ॐ अष्टादशद्वीपपतये नमः।
Om Ashtadashadvipapataye Namah।
जो अठारह द्वीपों के अधिपति हैं
- 945
अष्टादशपुराणकृत्
ॐ अष्टादशपुराणकृते नमः।
Om Ashtadashapuranakrite Namah।
जो अठारह पुराणों के रचीयता हैं
- 946
अष्टादशौषधीसृष्टि
ॐ अष्टादशौषधीसृष्टये नमः।
Om Ashtadashaushadhisrishtaye Namah।
जो अठारह प्रकार की औषधियों के उत्पत्तिकर्ता हैं
- 947
अष्टादशविधिस्मृत
ॐ अष्टादशविधिस्मृताय नमः।
Om Ashtadashavidhismritaya Namah।
जो मीमांसा दर्शन द्वारा प्रतिपादित अठारह प्रकार की विधियों के समान हैं
- 948
अष्टादशलिपिव्यष्टिसमष्टिज्ञानकोविद
ॐ अष्टादशलिपिव्यष्टिसमष्टिज्ञानकोविदाय नमः।
Om Ashtadashalipivyashtisamashtijnanakovidaya Namah।
जो अठारह प्रकार की लिपियों का ज्ञान रखने वाले हैं
- 949
एकविंश पुमान्
ॐ एकविंशाय पुंसे नमः।
Om Ekavimshaya Pumse Namah।
जो पञ्च ज्ञानेन्द्रिय आदि से परे इक्कीसवे तत्त्व हैं
- 950
एकविंशत्यङ्गुलिपल्लव
ॐ एकविंशत्यङ्गुलिपल्लवाय नमः।
Om Ekavimshatyangulipallavaya Namah।
जो इक्कीस कोमल अंगुलियों एवं एक सूँड वाले हैं
- 951
चतुर्विंशतितत्त्वात्मा
ॐ चतुर्विंशतितत्त्वात्मने नमः।
Om Chaturvimshatitattvatmane Namah।
जो चौबीस तत्व वाले हैं
- 952
पञ्चविंशाख्यपूरुष
ॐ पञ्चविंशाख्यपूरुषाय नमः।
Om Panchavimshakhyapurushaya Namah।
जो चौबीस तत्वों से परे पच्चीसवें पुरुष हैं
- 953
सप्तविंशतितारेश
ॐ सप्तविंशतितारेशाय नमः।
Om Saptavimshatitareshaya Namah।
जो अश्विनी आदि सत्ताईस नक्षत्रों के स्वामी हैं
- 954
सप्तविंशतियोगकृत्
ॐ सप्तविंशतियोगकृते नमः।
Om Saptavimshatiyogakrite Namah।
जो सत्ताईस योगों के कर्ता हैं
- 955
द्वात्रिंशद्भैरवाधीश
ॐ द्वात्रिंशद्भैरवाधीशाय नमः।
Om Dvatrimshadbhairavadhishaya Namah।
जो बत्तीस प्रकार के भैरवों के स्वामी हैं
- 956
चतुस्त्रिंशन्महाह्रद
ॐ चतुस्त्रिंशन्महाह्रदाय नमः।
Om Chatustrimshanmahahradaya Namah।
जो चौंतीस सरोवरों से भी विशाल सरोवर स्वरूप हैं
- 957
षट्त्रिंशत्तत्त्वसम्भूति
ॐ षट्त्रिंशत्तत्त्वसम्भूतये नमः।
Om Shattrimshattattvasambhutaye Namah।
जो छत्तीस तत्वों (सिद्धान्तों) के स्वामी हैं
- 958
अष्टात्रिंशत्कलातनु
ॐ अष्टात्रिंशत्कलातनवे नमः।
Om Ashtatrimshatkalatanave Namah।
जो अड़तीस कलाओं से युक्त हैं
- 959
नमदेकोनपञ्चाशन्मरुद्वर्गनिरर्गल
ॐ नमदेकोनपञ्चाशन्मरुद्वर्गनिरर्गलाय नमः।
Om Namadekonapanchashanmarudvarganirargalaya Namah।
जो उनचास प्रकार के मरुत गणों के विघ्न दूर करने वाले हैं
- 960
पञ्चाशदक्षरश्रेणि
ॐ पञ्चाशदक्षरश्रेण्यै नमः।
Om Panchashadaksharashrenyai Namah।
जो संस्कृत वर्णमाला में पचास अक्षर की श्रृंखला हैं
- 961
पञ्चाशद्रुद्रविग्रह
ॐ पञ्चाशद्रुद्रविग्रहाय नमः।
Om Panchashadrudravigrahaya Namah।
जो पचास प्रकार के रुद्रों के रूप में स्थित हैं
- 962
पञ्चाशद्विष्णुशक्तीश
ॐ पञ्चाशद्विष्णुशक्तीशाय नमः।
Om Panchashadvishnushaktishaya Namah।
जो पचास प्रकार की विष्णु शक्तियों के स्वामी हैं
- 963
पञ्चाशन्मातृकालय
ॐ पञ्चाशन्मातृकालयाय नमः।
Om Panchashanmatrikalayaya Namah।
जो पचास प्रकार के मातृका वर्ण के रूप में स्थित हैं
- 964
द्विपञ्चाशद्वपुःश्रेणि
ॐ द्विपञ्चाशद्वपुःश्रेण्यै नमः।
Om Dvipanchashadvapuhshrenyai Namah।
जो लिङ्गपुराण कथित बावन प्रकार की शारीरिक संरचना के स्वामी हैं
- 965
त्रिषष्ट्यक्षरसंश्रय
ॐ त्रिषष्ट्यक्षरसंश्रयाय नमः।
Om Trishashtyaksharasamshrayaya Namah।
जो तिरसठ अक्षरों के आधार हैं
- 966
चतुष्षष्ट्यर्णनिर्णेता
ॐ चतुष्षष्ट्यर्णनिर्णेत्रे नमः।
Om Chatushshashtyarnanirnetre Namah।
जो चौंसठ अक्षरों के निर्णायक हैं
- 967
चतुःषष्टिकलानिधि
ॐ चतुःषष्टिकलानिधये नमः।
Om Chatuhshashtikalanidhaye Namah।
जो चौंसठ कलाओं के ज्ञाता हैं
- 968
चतुष्षष्टिमहासिद्धयोगिनीवृन्दवन्दित
ॐ चतुष्षष्टिमहासिद्धयोगिनीवृन्दवन्दिताय नमः।
Om Chatushshashtimahasiddhayoginivrindavanditaya Namah।
जो अक्षोभ्य आदि चौंसठ महासिद्धों और उतनी ही योगिनियों द्वारा पूजित हैं
- 969
अष्टषष्टिमहातीर्थक्षेत्रभैरवभावन
ॐ अष्टषष्टिमहातीर्थक्षेत्रभैरवभावनाय नमः।
Om Ashtashashtimahatirthakshetrabhairavabhavanaya Namah।
जो शिव के अड़सठ महतीर्थों में स्थित भैरव द्वारा पूजे जाने वाले हैं
- 970
चतुर्नवतिमन्त्रात्मा
ॐ चतुर्नवतिमन्त्रात्मने नमः।
Om Chaturnavatimantratmane Namah।
जो चौरानबे मूल मन्त्रों के रूप में स्थित हैं
- 971
षण्णवत्यधिकप्रभु
ॐ षण्णवत्यधिकप्रभवे नमः।
Om Shannavatyadhikaprabhave Namah।
जो तन्त्रराज तन्त्र में वर्णित छियानबे से अधिक देवताओं के अधिपति हैं
- 972
शतानन्द
ॐ शतानन्दाय नमः।
Om Shatanandaya Namah।
जो मानुष आदि से सेकड़ों गुना प्रसन्न रहने वाले हैं
- 973
शतधृति
ॐ शतधृतये नमः।
Om Shatadhritaye Namah।
जो अनन्त ब्रह्माण्ड को धारण करने वाले हैं
- 974
शतपत्रायतेक्षण
ॐ शतपत्रायतेक्षणाय नमः।
Om Shatapatrayatekshanaya Namah।
जो कमल के समान विशाल नयनों वाले हैं
- 975
शतानीक
ॐ शतानीकाय नमः।
Om Shatanikaya Namah।
जो अनन्त सैनिकों के स्वामी हैं
- 976
शतमख
ॐ शतमखाय नमः।
Om Shatamakhaya Namah।
जो सौ यज्ञों का अनुष्ठान करने वाले इन्द्रस्वरूप हैं
- 977
शतधारावरायुध
ॐ शतधारावरायुधाय नमः।
Om Shatadharavarayudhaya Namah।
जो सौ धारों से युक्त तीक्ष्ण वज्र धारण करने वाले हैं
- 978
सहस्रपत्रनिलय
ॐ सहस्रपत्रनिलयाय नमः।
Om Sahasrapatranilayaya Namah।
जो सहस्रार चक्र में स्थित रहने वाले हैं
- 979
सहस्रफणभूषण
ॐ सहस्रफणभूषणाय नमः।
Om Sahasraphanabhushanaya Namah।
जो सहस्र फन वाले नाग से सुशोभित हैं
- 980
सहस्रशीर्षा पुरुष
ॐ सहस्रशीर्ष्णे पुरुषाय नमः।
Om Sahasrashirshne Purushaya Namah।
जो असंख्य मस्तक वाले हैं
- 981
सहस्राक्ष
ॐ सहस्राक्षाय नमः।
Om Sahasrakshaya Namah।
जो सहस्र नेत्रों वाले हैं
- 982
सहस्रपात्
ॐ सहस्रपदे नमः।
Om Sahasrapade Namah।
जो सहस्र पैरों वाले हैं
- 983
सहस्रनामसंस्तुत्य
ॐ सहस्रनामसंस्तुत्याय नमः।
Om Sahasranamasamstutyaya Namah।
जिनकी स्तुति सहस्र नामों द्वारा की जाती है
- 984
सहस्राक्षबलापह
ॐ सहस्राक्षबलापहाय नमः।
Om Sahasrakshabalapahaya Namah।
जो इन्द्र के बल को भी विध्वस्त कर देने वाले हैं
- 985
दशसहस्रफणिभृत्फणिराजकृतासन
ॐ दशसाहस्रफणिभृत्फणिराजकृतासनाय नमः।
Om Dashasahasraphanibhritphanirajakritasanaya Namah।
जो दस हजार फण धारण करने वाले नागराज वासुकि के ऊपर आसीन हैं
- 986
अष्टाशीतिसहस्रौघमहर्षिस्तोत्रयन्त्रित
ॐ अष्टाशीतिसहस्राद्यमहर्षिस्तोत्रयन्त्रिताय नमः।
Om Ashtashitisahasradyamaharshistotrayantritaya Namah।
जो अट्ठासी हजार आद्य महर्षियों की स्तुति एवं श्रद्धा के बन्धन में हैं
- 987
लक्षाधीशप्रियाधार
ॐ लक्षाधीशप्रियाधाराय नमः।
Om Lakshadhishapriyadharaya Namah।
जो लक्षपतियों के प्रिय आधार हैं
- 988
लक्षाधीशमनोमय
ॐ लक्षाधीशमनोमयाय नमः।
Om Lakshadhishamanomayaya Namah।
जो एकाग्रचित्त एवं सत्पुरुष स्वरूप हैं
- 989
चतुर्लक्षजपप्रीत
ॐ चतुर्लक्षजपप्रीताय नमः।
Om Chaturlakshajapapritaya Namah।
जो चार लाख मन्त्र जप द्वारा प्रसन्न होने वाले हैं
- 990
चतुर्लक्षप्रकाशित
ॐ चतुर्लक्षप्रकाशिताय नमः।
Om Chaturlakshaprakashitaya Namah।
जो अठारह पुराणों में वर्णित चार लाख श्लोकों द्वारा वर्णित रूप वाले हैं
- 991
चतुरशीतिलक्षाणां जीवानां देहसंस्थित
ॐ चतुरशीतिलक्षाणां जीवानां देहसंस्थिताय नमः।
Om Chaturashitilakshanam Jivanam Dehasamsthitaya Namah।
जो चौरासी लाख जीवों के शरीर में विराजमान हैं
- 992
कोटिसूर्यप्रतीकाश
ॐ कोटिसूर्यप्रतीकाशाय नमः।
Om Kotisuryapratikashaya Namah।
जो करोड़ों सूर्य के समान तेज वाले हैं
- 993
कोटिचन्द्रांशुनिर्मल
ॐ कोटिचन्द्रांशुनिर्मलाय नमः।
Om Kotichandramshunirmalaya Namah।
जो करोड़ों चन्द्रमा के समान निर्मल हैं
- 994
शिवाभवाध्युष्टकोटिविनायकधुरन्धर
ॐ शिवाभवाध्युष्टकोटिविनायकधुरन्धराय नमः।
Om Shivabhavadhyushtakotivinayakadhurandharaya Namah।
जो करोड़ो विनायकों का नेतृत्व करने वाले हैं
- 995
सप्तकोटिमहामन्त्रमन्त्रितावयवद्युति
ॐ सप्तकोटिमहामन्त्रमन्त्रितावयवद्युतये नमः।
Om Saptakotimahamantramantritavayavadyutaye Namah।
जो सात करोड़ मन्त्रों का तेज धारण करने वाले हैं
- 996
त्रयस्त्रिंशत्कोटिसुरश्रेणीप्रणतपादुक
ॐ त्रयस्त्रिंशत्कोटिसुरश्रेणीप्रणतपादुकाय नमः।
Om Trayastrimshatkotisurashrenipranatapadukaya Namah।
तैंतीस कोटि देव जिनकी चरण पादुकाओं को प्रणाम करते हैं
- 997
अनन्तनाम
ॐ अनन्तनाम्ने नमः।
Om Anantanamne Namah।
जो अनन्त नामों वाले हैं
- 998
अनन्तश्री
ॐ अनन्तश्रिये नमः।
Om Anantashriye Namah।
जो अनन्त विद्या एवं सम्पत्ति वाले हैं
- 999
अनन्तानन्तसौख्यद
ॐ अनन्तानन्तसौख्यदाय नमः।
Om Anantanantasaukhyadaya Namah।
जो अनन्त प्रकार की धन-सम्पदा एवं सुख-सौभाग्य प्रदान करने वाले हैं
Namavali · Ganesha
1000 Names of Ganesha
श्री गणेश सहस्रनामावली
The Sahasranamavali, the full thousand names with meanings.