Stotra · Vishnu

Shri Dinabandhu Ashtakam

श्री दीनबन्धु अष्टकम् श्री दीनबन्ध्वष्टकम्

को समर्पित एक अत्यन्त लोकप्रिय अष्टकम् है। भगवान विष्णु से सम्बन्धित विभिन्न अवसरों पर उन्हें प्रसन्न करने हेतु इस अष्टकम् का पाठ किया जाता है।

श्री दीनबन्ध्वष्टकम्

यस्मिन्नवस्थितमशेषमशेषमूले।

दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥

गुर्वी गदा दरवरश्च विभाति यस्य।

पक्षीन्द्रपृष्ठपरिरोपितपादपद्मो।

दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥

च पाण्डववधूः स्थगिता दुकूलैः।

संमोचितो जलचरस्य मुखाद्गजेन्द्रो।

दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥

कोपेक्षणेन दनुजा विलयं व्रजन्ति।

भीताश्चरन्ति च यतोऽर्कयमानिलाद्या।

दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥

ध्यायन्ति धीरमतयो यतयो विविक्ते।

पश्यन्ति योगिपुरुषाः पुरुषं शरीरे।

दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥

भक्तानुकम्पननिमित्तगृहीतमूर्तिः।

यः सर्वगोऽपि कृतशेषशरीरशय्यो।

दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥

राराध्यते भवदवानलदाहशान्त्यै।

सर्वापराधमविचिन्त्य ममाखिलात्मा।

दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥

हित्वाखिलं कलिमलं भुवनं पुनाति।

दग्ध्वा ममाघमखिलं करुणेक्षणेन।

दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥

ब्रह्मानन्देन भाषितम्।

तस्य विष्णुः प्रसीदति॥

इति श्रीमत्परमहंसस्वामिब्रह्मानन्दविरचितं श्रीदीनबन्ध्वष्टकं सम्पूर्णम्

भगवान विष्णु सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के पालक और त्रिमूर्ति में से एक हैं। ऐसा माना जाता है कि यह दृश्य जगत, क्षीरसागर में शयन कर रहें भगवान विष्णु का स्वप्न है। इस पृष्ठ पर आप भगवान विष्णु से सम्बन्धित बहुत सी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

भगवान विष्णु के पूजन और जप में उपयोग होने वाले मन्त्रों की सूचि इस पृष्ठ पर उपलब्ध करायी गयी है। इनमें से कुछ मन्त्र पौराणिक तो कुछ वैदिक हैं। इसके साथ ही भगवान विष्णु के शक्तिशाली यन्त्र को भी इस पृष्ठ से देखा जा सकता है।

रंगीन चित्र के रूप में प्रदान किया गया है। भक्तगण इस यन्त्र का प्रयोग साधना हेतु करते हैं। हिन्दु धर्म में यन्त्र को साक्षात् सम्बन्धित देवी-देवता का ही स्वरूप मानकर उसकी पूजा-अर्चना की जाती है।

भगवान विष्णु के दस प्रमुख अवतारों की सूचि और उनकी जयन्ती के दिन इस पृष्ठ पर बताये गये हैं। इस पृष्ठ से आप सभी अवतारों के विषय में रोचक जानकारियाँ भी प्राप्त कर सकते हैं।

ॐ विष्णवे नमः।

ॐ लक्ष्मीपतये नमः।

ॐ कृष्णाय नमः।

ॐ प्रह्लादपरिपालकाय नमः।

ॐ श्रीमहाविष्णवे नमः।

आदि नामों एवं मन्त्रों से युक्त भगवान विष्णु की अष्टोत्तर शतनामावली अर्थ एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है।

ॐ विश्वस्मै नमः।

ॐ विष्णवे नमः।

ॐ वषट्काराय नमः।

ॐ अक्षोभ्याय नमः।

ॐ सर्वप्रहरणायुधाय नमः।

उक्त मन्त्रों एवं नामों से युक्त भगवान विष्णु की सहस्रनामावली अर्थ एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है। एकादशी सहित विभिन्न धार्मिक अवसरों पर इन मन्त्रों का जाप किया जाता है।

का ही एक रूप हैं।

भगवान सत्यनारायण के व्रत की कथा के सम्पूर्ण पाँच अध्याय, व्रत के दिन और सत्यनारायण भगवान की आरती इस पृष्ठ पर पढ़ी जा सकती है। सत्यनारायण का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस व्रत को करने से अभीष्ट कामनाओं की पूर्ति होती है।

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